सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही: 9 महीने से मंदबुद्धि बेटी का राशन कार्ड नहीं बना, गरीब परिवार दर-दर भटकने को मजबूर

फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। जिले में जन समस्याओं के समाधान के दावों के बीच गरीब और जरूरतमंद परिवारों को लगातार सरकारी लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है। सेक्टर-7ए निवासी गुरमीत सिंह पिछले नौ महीनों से अपनी मंदबुद्धि बेटी सुहानी और स्वयं का बीपीएल राशन कार्ड बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों और जन समस्या समाधान शिविरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

गुरमीत सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी का निधन हो चुका है और वह अपनी विशेष जरूरतों वाली बेटी की देखभाल अकेले कर रहे हैं। परिवार किराये के मकान में रहता है और उनके पास केवल एक स्कूटी है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा उनकी पात्रता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। कई बार आवेदन और शिकायतें देने के बाद भी राशन कार्ड नहीं बन पाया है, जिससे परिवार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

केवल गुरमीत सिंह ही नहीं, बल्कि करनेरा गांव से आने वाली पूजा भी सरकारी रिकॉर्ड की गलतियों का खामियाजा भुगत रही हैं। पूजा ने बताया कि उनके पति रिक्शा चालक हैं, लेकिन फैमिली आईडी में परिवार की वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये दर्ज कर दी गई है। उनका सवाल है कि एक रिक्शा चालक इतनी आय कैसे अर्जित कर सकता है। गलत आय दर्ज होने के कारण उनका बीपीएल राशन कार्ड भी काट दिया गया है।

पूजा का कहना है कि वह हर बार किराया खर्च करके संबंधित कार्यालयों और शिविरों में पहुंचती हैं, लेकिन महीनों से उनकी आय संबंधी त्रुटि को ठीक नहीं किया गया। अधिकारियों की उदासीनता के कारण उनका परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। इसी प्रकार राजीव कॉलोनी निवासी मंजू की परेशानी भी कम नहीं है। फैमिली आईडी में आय अधिक दर्ज होने के कारण उनका बीपीएल राशन कार्ड भी रद्द कर दिया गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया है।

इन मामलों ने सरकारी व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार महीनों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग उनकी समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे। ऐसे में जन समस्या समाधान शिविरों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है, क्योंकि शिकायतें दर्ज होने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।

 

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Author: Prime Haryana

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