फरीदाबाद,। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित नागरिकों की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़कर फरीदाबाद जिले की ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ परिवार की आय बढ़ाने और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

समूहों के माध्यम से मिले ऋण, प्रशिक्षण, रोजगार और वित्तीय सेवाओं ने महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। लाभार्थी महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रति आभार व्यक्त किया।
साहूपुरा की राधा ने शिक्षा और रोजगार को बनाया आधार
गांव साहूपुरा निवासी राधा ने बताया कि पहले वह घर से बाहर निकलने में भी संकोच करती थीं और बाहरी दुनिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें 10 हजार रुपये की सहायता मिली, जिसका उपयोग उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में किया। समूह से जुड़कर उन्होंने कामकाज की जानकारी हासिल करने के साथ अपनी 12वीं कक्षा की पढ़ाई भी पूरी की।
इसके बाद उन्हें ऑटो की सुविधा मिली, जिससे परिवार के लिए आय का नया साधन बना। राधा अब स्वयं सहायता समूह, विलेज ऑर्गेनाइजेशन और क्लस्टर स्तर की गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। उनके अनुसार प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से आत्मविश्वास बढ़ा है।
सुनीता ने 30 समूहों के गठन में निभाई भूमिका
सिकरोना गांव निवासी सुनीता ने बताया कि उन्हें स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से समूह सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। उन्होंने गांव में करीब 30 समूहों के गठन में भूमिका निभाई। समूह से प्राप्त आय से उन्होंने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ खेती-किसानी में पति का सहयोग किया। पहले खाद और बीज जैसी आवश्यकताओं के लिए आर्थिक परेशानी होती थी।
लेकिन समूह से जुड़ने के बाद प्राप्त आमदनी से इन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली। प्रशिक्षण के माध्यम से उनके ज्ञान और कार्यकुशलता में भी वृद्धि हुई।
कविता ने संभाली नेतृत्व और वित्तीय जिम्मेदारियां
पन्हेड़ा कलां निवासी कविता ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने में रुचि नहीं दिखाई थी, लेकिन बाद में इससे जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने समूह में सचिव और विलेज ऑर्गेनाइजेशन में प्रधान के रूप में काम किया। बाद में समूह सखी की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्तमान में वह कई समूहों का लेखा-जोखा संभालने के साथ सिलाई का काम करती हैं।
एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्हें बीआरपी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर उन्होंने फरीदाबाद का प्रतिनिधित्व किया। वह पंचायतों में ऑडिट से जुड़े कार्यों में भी भाग लेती हैं और ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं।
पूनम ने सिलाई से शुरू किया स्वरोजगार
आलमपुर निवासी पूनम ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों की शुरुआत के समय उन्हें बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की ज्यादा जानकारी नहीं थी। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बैंक खाता, वित्तीय लेन-देन और अन्य बैंकिंग सेवाओं की जानकारी हासिल की। उन्होंने गांव की उन महिलाओं को भी बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में मदद की, जो बैंक जाने में झिझकती थीं।
पूनम ने समूह से ऋण लेकर सिलाई मशीन खरीदी और अपना काम शुरू किया। अब वह अन्य महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण भी देती हैं। इसके अलावा स्कूल में पढ़ाने और घर पर ट्यूशन देने का काम करती हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद वह अपने खर्च स्वयं उठाने में सक्षम हुई हैं।
महिलाओं में बढ़ा आत्मविश्वास और नेतृत्व
इन महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि स्वयं सहायता समूह और एनआरएलएम ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक अवसर देने के साथ उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को भी बढ़ावा दे रहे हैं। महिलाएं स्वरोजगार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और पंचायत स्तर की गतिविधियों से जुड़कर अपनी सामाजिक भागीदारी बढ़ा रही हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से ऐसी सफलता की कहानियां सामने लाकर अन्य महिलाओं को भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
