फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। ईएसएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक जनरल सर्जरी पीजी रेजिडेंट डॉक्टर की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे समय पर इलाज न मिलने के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन इंडिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

घटना 19 सितंबर 2026 की बताई जा रही है, जब उक्त पीजी डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी के दौरान अचानक कमजोरी महसूस करने लगे। रेजिडेंट डॉक्टरों के मुताबिक यह कमजोरी बाद में क्वाड्रिपेरेसिस यानी चारों अंगों में शिथिलता की स्थिति तक पहुंच गई। एसोसिएशन का दावा है कि पीड़ित डॉक्टर बीमार पड़ने से पहले 48 घंटों में करीब 35 घंटे लगातार ड्यूटी कर चुके थे।
डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन इंडिया ने अस्पताल प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिनमें डॉक्टर को समय पर शिफ्ट न करना, आपातकालीन जांच में देरी, जरूरी उपकरणों की अनुपलब्धता, एम्बुलेंस व्यवस्था में कमी और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श में विलंब शामिल हैं। एसोसिएशन ने इसे किसी एक व्यक्ति का मामला न मानकर रेजिडेंट डॉक्टरों की सुरक्षा, कार्य-अवधि और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ा व्यापक मुद्दा करार दिया है।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान बीमार पड़ने वाले डॉक्टर को ही समय पर आपातकालीन इलाज पाने में दिक्कतें झेलनी पड़ें, तो यह संस्थान की आपातकालीन तैयारियों और रेजिडेंट डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।
एसोसिएशन ने अपनी मांगों में कहा है कि सबसे पहले इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। जांच में जो भी अधिकारी या व्यक्ति जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही एसोसिएशन ने मांग की है कि ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए प्राथमिकता के आधार पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु एक स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
डीएमए इंडिया ने अत्यधिक ड्यूटी आवर्स के मुद्दे को भी गंभीरता से उठाते हुए कहा कि सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम, 1992 के प्रावधानों के अनुपालन की समीक्षा की जाए और यदि इसका उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। इसके अलावा एसोसिएशन ने मांग की है कि अस्पताल में जरूरी आपातकालीन उपकरण, समय पर जांच की सुविधा, एम्बुलेंस व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए समुचित आपातकालीन सहायता हर समय सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए प्राथमिकता के आधार पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा की स्पष्ट एसओपी लागू की जाए।
अत्यधिक ड्यूटी आवर्स की जांच कर सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम, 1992 के प्रावधानों के पालन की समीक्षा हो और उल्लंघन पर कार्रवाई की जाए।
अस्पताल में जरूरी आपातकालीन उपकरण, समय पर जांच, एम्बुलेंस और विशेषज्ञ परामर्श की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
डीएमए इंडिया ने केंद्रीय श्रम मंत्री, ईएसएसआईसी महानिदेशक और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट देने की मांग की है। एसोसिएशन ने ईएसएसआईसी फरीदाबाद के रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ पूर्ण एकजुटता जताते हुए कहा कि वह उनकी सुरक्षा और सुरक्षित कार्य-परिस्थितियों की मांग में उनके साथ खड़ा है। एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी डॉक्टर को अपने ही संस्थान में आपातकालीन इलाज के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए।
