फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने 41 वर्षीय मोटापे से ग्रस्त मरीज की सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर उसके गॉलब्लैडर से 4,000 से अधिक गॉलस्टोन निकालने में सफलता हासिल की। डॉक्टरों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में गॉलस्टोन का एक साथ पाया जाना बेहद दुर्लभ मामलों में शामिल है।

मरीज लंबे समय से पेट में तेज दर्द और अन्य परेशानियों से जूझ रहा था। मरीज मोटापे के साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित था। इन परिस्थितियों के चलते उसे हाई-रिस्क क्लिनिकल प्रोफाइल में रखा गया था। जांच के बाद डॉक्टरों की टीम ने तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया।
गंभीर सूजन के साथ गॉलब्लैडर में मिले हजारों स्टोन
अस्पताल पहुंचने के समय मरीज के पेट में पिछले करीब एक सप्ताह से तेज दर्द था, जो लगातार बढ़ता जा रहा था। इसके साथ ही उसे उल्टी और गंभीर अपच की शिकायत भी थी। जांच में गॉलब्लैडर में गंभीर सूजन के साथ हजारों बेहद छोटे गॉलस्टोन पाए गए। डॉक्टरों के मुताबिक गॉलब्लैडर में 4,000 से अधिक स्टोन होने के कारण संक्रमण बढ़ने, गॉलब्लैडर के फटने, बाइल डक्ट में रुकावट और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा था। ऐसे में समय पर सर्जरी करना जरूरी था।
45 मिनट में पूरी हुई लैप्रोस्कोपिक सर्जरी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्जिकल टीम ने मिनिमली इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी की। जनरल एनेस्थीसिया के तहत करीब 45 मिनट में प्रक्रिया पूरी की गई। सर्जरी के दौरान गॉलब्लैडर को सफलतापूर्वक निकालकर उसमें मौजूद हजारों गॉलस्टोन को हटाया गया। मरीज की अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए सर्जिकल टीम के साथ नेफ्रोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञों ने भी उपचार में सहयोग किया। इससे सर्जरी के दौरान और बाद में मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिली।
कुछ दिनों में अस्पताल से मिली छुट्टी
सर्जरी के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ। कुछ ही दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल के अनुसार, छुट्टी के समय मरीज दर्द से राहत महसूस कर रहा था और सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम था। डॉक्टरों का कहना है कि अनियमित खानपान, अत्यधिक वजन और आरामदायक जीवनशैली जैसी स्थितियां पित्त की पथरी की समस्या का खतरा बढ़ा सकती हैं। पेट में लगातार दर्द, उल्टी, अपच या अन्य संबंधित लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
