फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों पर नगर निगम अब शुरुआती स्तर पर ही शिकंजा कसने की तैयारी में है। निगम का उद्देश्य अवैध निर्माण बढ़ने से पहले ही उसे रोकना है, ताकि बाद में बड़े स्तर पर तोड़फोड़ अभियान चलाने में सरकारी संसाधनों और राजस्व की बर्बादी न हो।

मुख्य नगर योजनाकार की ओर से नगर निगम की इंजीनियरिंग शाखा और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर अवैध निर्माणों को बिजली, पानी और सीवर कनेक्शन देने पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कहा गया है। अधिकारियों के मुताबिक सरकारी जमीन पर कब्जा कर विकसित की जा रही कॉलोनियों में सुविधाओं के कनेक्शन मिलने से वहां धीरे-धीरे आबादी बढ़ती जाती है और बाद में कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
बिना सीएलयू और नक्शे के व्यावसायिक गतिविधियों पर भी नजर
नगर निगम ने उन भवन मालिकों पर भी कार्रवाई की तैयारी की है, जो बिना सीएलयू और स्वीकृत भवन नक्शे के व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर देते हैं। ऐसे मामलों में भी बिजली कनेक्शन देने से पहले संबंधित दस्तावेजों की जांच करने की आवश्यकता जताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों की अनदेखी से एक तरफ सरकारी राजस्व का नुकसान होता है, वहीं बाद में अवैध निर्माण हटाने के लिए निगम को मशीनरी, कर्मचारी और अन्य संसाधन लगाने पड़ते हैं।
अवैध कॉलोनियों में कनेक्शन बने बड़ी चुनौती
नगर निगम क्षेत्र में पहले भी कई स्थानों पर सरकारी जमीन पर कब्जे और अवैध प्लाटिंग के मामले सामने आ चुके हैं। खोरी और जमाई कॉलोनी जैसे मामलों में धीरे-धीरे कब्जे बढ़ते गए। अधिकारियों के अनुसार बिजली कनेक्शन मिलने से लोगों में यह धारणा भी बन जाती है कि संबंधित क्षेत्र वैध है। नेहरू कॉलोनी में करीब 250 अवैध निर्माण हटाने के दौरान निगम की टीम को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। अधिकारियों के मुताबिक वहां कई भवनों में बिजली और अन्य सुविधाओं के कनेक्शन मौजूद थे।
तोड़फोड़ अभियान में लाखों रुपये तक खर्च
अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई में निगम को भारी खर्च उठाना पड़ता है। पिछले माह गुरुग्राम रोड स्थित जमाई कॉलोनी में कार्रवाई के दौरान आठ अर्थमूवर मशीनें लगाई गई थीं। निगम के वाहन शाखा के कर्मचारियों के अनुसार एक अर्थमूवर करीब आठ से नौ लीटर डीजल प्रति घंटे खर्च करती है। छह घंटे तक चली कार्रवाई में ही 500 लीटर से अधिक डीजल की खपत हुई।
इसके अलावा पुलिस बल, कर्मचारी, मशीनरी और अन्य संसाधनों का खर्च अलग रहा। निगम अधिकारियों के अनुसार एक दिन की कार्रवाई में कुल खर्च एक लाख रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है। कई मामलों में एक ही स्थान पर दोबारा कार्रवाई करनी पड़ने से सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ता है।
कनेक्शन देने की प्रक्रिया में सख्ती की मांग
पूर्व बड़खल निगरानी समिति सदस्य आनंदकांत भाटिया ने कहा कि केवल अवैध निर्माण गिराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। अवैध प्लाटिंग करने वालों के साथ-साथ नियमों की अनदेखी कर कनेक्शन उपलब्ध कराने वाले जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं नगर निगम के अधीक्षण अभियंता ओमवीर सिंह के अनुसार सीवर और पानी के कनेक्शन के लिए प्रॉपर्टी आईडी समेत आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाती है।
अवैध कॉलोनियों में सीवर कनेक्शन नहीं दिया जाता। कुछ स्थानों पर लोग मुख्य पानी की लाइन से अवैध रूप से कनेक्शन जोड़ लेते हैं, जिन्हें रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई बढ़ाई जाएगी। मुख्य नगर योजनाकार धर्मपाल सिंह ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जे और बिना सीएलयू भवन निर्माण को रोकने के लिए शुरुआत में ही प्रभावी घेराबंदी जरूरी है। इसी उद्देश्य से निगम की इंजीनियरिंग शाखा और बिजली वितरण निगम को पत्र भेजा गया है।
आंकड़ों में अवैध निर्माण पर कार्रवाई
नगर निगम की जमीन पर 150 एकड़ से अधिक क्षेत्र में कब्जे की जानकारी सामने आई है। जमाई कॉलोनी में 100 से अधिक मकानों को ढहाया जा चुका है, जबकि करीब सात माह पहले कॉलोनी में 200 से अधिक अवैध कब्जों पर कार्रवाई की गई थी। वहीं नेहरू कॉलोनी में निगम ने 250 मकानों को तोड़ा। पिछले आठ माह के दौरान नगर निगम की ओर से अवैध निर्माण और कब्जों के खिलाफ कुल 15 बार तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा चुकी है।
