हल्द्वानी में खरगे के शुद्धिकरण पर बोले शशि थरूर, कहा- ‘जो कुछ हुआ वह…’


केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ उत्तराखंड के हल्द्वानी में कथित छुआछूत की घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हाल ही में हल्द्वानी में जो कुछ हुआ, वह सिर्फ कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी पर हमला नहीं है, यह इस देश के हर दलित नागरिक की गरिमा पर सीधा हमला है.

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान किसी भी तरह की अस्पष्टता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ता है. छुआछूत को खत्म कर दिया गया है और किसी भी रूप में इसका अभ्यास पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

शशि थरूर ने विरोध के लिए कौन से पांच कारण बताए?

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार (29 अगस्त, 2026) को इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है. उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मीडिया को बयान देते वीडियो शेयर करते हुए कुछ कारणों के बारे में बताया और कहा कि कुछ कारण हैं कि हम चुप इसे लेकर चुप क्यों नहीं रह सकते हैं और न ही चुप रहेंगे.’ 

उन्होंने कहा, ‘पहला कारण- खरगे जी के लिए न्याय, सभी दलितों के लिए न्याय हैः यह कोई निजी मुद्दा या साधारण राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं है. अगर देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दशकों से लोगों की सेवा के लिए समर्पित एक नेता को इस मानसिकता का सामना करना पड़ सकता है, तो सोचिए कि पूरे भारत में साधारण दलित नागरिकों और बच्चों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में किन मुश्किलों और अपमान का सामना करना पड़ता होगा.

  • दूसरा कारण- इसे वही नाम दें, जो यह असलियत में है- छुआछुतः जैसा कि राहुल गांधी ने भी कहा कि शुद्धिकरण या सफाई जैसे शब्दों के पीछे छिपने की कोशिश करने से इस घटना की असलियत तो नहीं बदल जाती है. किसी प्रमुख दलित नेता की मौजूदगी के बाद शुद्धिकरण करना छुआछुत की मानसिकता को दिखाता है. यह असंवैधानिक, अस्वीकार्य और एससी/एसटी एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है.
  • तीसरा कारण- असली कारण भाजपा की विचारधारा हैः कोई भी बहाना, अफसोस या शब्दों की कलाकारी इस मुश्किल की जड़ को छिपा नहीं सकती है. यह घटना भाजपा के नेतृत्व और उसकी विचारधारा में गहराई तक पैठ बनाए हुई भेदभाव वाली मानसिकता को दिखाती है. हमें जिम्मेदार लोगों को जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं देनी चाहिए.
  • चौथा कारण- बहानों के बजाए कार्रवाईः हमें इंटरनल इंक्वायरी के वादों या खोखले शब्दों में कोई रुचि नहीं है. संविधान के तहत अपराध, अपराध ही रहता है. चाहे उसे किसी भी तरह से किया जाए. हम कड़ी कार्रवाई, जवाबदेही और न्याय की मांग करते हैं.
  • पांचवां कारण- संविधान की रक्षा की लड़ाईः हमारी लड़ाई राजनीतिक गंठबंधनों, छिटपुट विवादों या साधारण पार्टी की प्रतिद्वंद्विता को लेकर नहीं है. कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक लड़ाई भारत के संविधान की रक्षा करना और उसे कमजोर करने वाली भेदभाव वाली विचारधारा का लगातार मुकाबला करना है.’

समानता एक संवैधानिक अधिकार- थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘हम समानता, न्याय और व्यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़े हैं. समानता कोई ऐसी सुविधा नहीं है, जो किसी दी जाए, यह देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है.’ 

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Author: Prime Haryana

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