फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। ग्रेटर फरीदाबाद स्थित सेक्टर-86 की एडोर हैप्पी होम सोसायटी में पिछले कई दिनों से बिजली और पेयजल संकट से परेशान लोगों का आक्रोश रविवार को सड़क पर दिखाई दिया। बड़ी संख्या में निवासियों ने एकत्र होकर बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी के खिलाफ प्रदर्शन किया तथा जल्द से जल्द मूलभूत सुविधाएं बहाल करने की मांग की।

782 परिवारों को झेलनी पड़ रही परेशानी
सोसायटी में कुल 782 फ्लैट हैं, जिनका कब्जा करीब तीन वर्ष पहले लोगों को मिला था। निवासियों का कहना है कि वर्तमान में एक फ्लैट की कीमत 75 लाख रुपये से अधिक है। इसके बावजूद नियमित रूप से मेंटेनेंस, बिजली और पानी के बिल चुकाने के बाद भी उन्हें आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
दस दिनों से पेयजल संकट
स्थानीय निवासियों के अनुसार पिछले करीब दस दिनों से सोसायटी में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। लोगों को टैंकरों के सहारे अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिल्डर और मेंटेनेंस एजेंसी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पेयजल आपूर्ति के लिए लगी मोटरें भी खराब पड़ी हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही।
रोजाना 8 से 10 घंटे तक बिजली कटौती का आरोप
निवासियों का कहना है कि सोसायटी में लगातार अघोषित बिजली कटौती हो रही है। उनके मुताबिक कई बार प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक बिजली गुल रहती है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
लोगों का आरोप है कि बिल्डर ने बिजली विभाग से एक ही कनेक्शन लिया हुआ है और उसी के माध्यम से पूरे परिसर में बिजली की आपूर्ति की जाती है। साथ ही फ्लैट मालिकों को बिजली विभाग के व्यक्तिगत मीटर लगवाने की अनुमति भी नहीं दी जा रही।
रातभर अंधेरे में रहने को मजबूर लोग
निवासियों के अनुसार शनिवार रात करीब आठ बजे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी, जो रविवार तड़के लगभग तीन बजे बहाल हो सकी। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को भी ऐसी ही स्थिति बनी रही। उनका कहना है कि पिछले दस दिनों में बिजली और पानी की समस्या पहले की तुलना में अधिक गंभीर हो गई है।
हैंडओवर में भी हो रही देरी
सोसायटी के लोगों ने आरोप लगाया कि बिल्डर अब तक सोसायटी का प्रबंधन रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को सौंपने में भी देरी कर रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था आरडब्ल्यूए को सौंप दी जाती, तो समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता था। मेंटेनेंस एजेंसी के प्रतिनिधि रितिक चंदीला से इस मामले में पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
