फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। शहर में पिछले एक दशक के दौरान विकास परियोजनाओं के लिए अरावली वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई। अब उनकी भरपाई के लिए वन विभाग ने 90 हेक्टेयर भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना तैयार की है। यह भूमि विभिन्न सरकारी और निजी एजेंसियों द्वारा प्रतिपूरक वनीकरण (कंपेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन) के तहत वन विभाग को उपलब्ध कराई गई है।

वन विभाग ने पौधारोपण का विस्तृत प्रस्ताव राज्य और केंद्र सरकार को भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और स्वीकृति मिलते ही कैंपा (CAMPA) योजना के तहत इस वर्ष पौधारोपण अभियान शुरू कर दिया जाएगा।
वन क्षेत्र में आई कमी
भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) की हालिया द्विवार्षिक रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद जिले का कुल वन क्षेत्र 78.43 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन इसमें 1.08 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज की गई है। वर्तमान में जिले में 25.98 वर्ग किलोमीटर मध्यम घना वन और 52.45 वर्ग किलोमीटर खुला वन क्षेत्र शेष है।
वन विभाग का कहना है कि एक दशक में विकास कार्यों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए, हालांकि विभाग के पास उनकी सटीक संख्या उपलब्ध नहीं है। इसका असर पर्यावरणीय संतुलन और जिले की हरियाली पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
पौधारोपण अभियान जारी
वन विभाग एक जुलाई से पौधारोपण एवं पौधा वितरण अभियान चला रहा है। अभियान के तहत अब तक करीब 40 हजार पौधे लगाए और लोगों को वितरित किए जा चुके हैं। विभाग शहर के विभिन्न हिस्सों में भी लगातार पौधारोपण कर रहा है और नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
क्या है कैंपा योजना?
कैंपा (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority) योजना का उद्देश्य विकास परियोजनाओं के कारण काटे गए पेड़ों की भरपाई करना और वन क्षेत्र को पुनर्जीवित करना है। सड़क, उद्योग या अन्य परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग पर संबंधित एजेंसियों से प्रतिपूरक राशि ली जाती है, जिसका उपयोग खाली भूमि पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण में किया जाता है।
एजेंसियों को निभानी होती है यह जिम्मेदारी
वन संरक्षण अधिनियम के तहत वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए करने से पहले सरकार की अनुमति आवश्यक होती है। साथ ही संबंधित एजेंसी को वन पारिस्थितिकी मूल्य के अनुसार मुआवजा जमा करना पड़ता है और प्रतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि भी उपलब्ध करानी होती है। अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष कुछ एजेंसियों द्वारा निर्धारित मुआवजा समय पर जमा नहीं कराने के कारण प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी थी। इस बार सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं, इसलिए स्वीकृति मिलने की पूरी उम्मीद है।
अधिकारी ने क्या कहा?
वन मंडल अधिकारी झलकार उयाके ने बताया कि पौधारोपण के लिए प्रस्ताव राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। केंद्र स्तर पर मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। स्वीकृति मिलते ही कैंपा योजना के तहत 90 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही शहर में विभिन्न स्थानों पर हरियाली बढ़ाने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा।
