फरीदाबाद के सोतई गांव में पुलिस सुरक्षा में एक्सप्रेसवे निर्माण फिर शुरू, किसानों ने कहा मुआवजा नहीं मिला

फरीदाबाद, (सरूप सिंह) सोतई गांव की जाट पट्टीशामलात भूमि पर बुधवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो गया। सुबह-सुबह एक महिला ने इस कार्रवाई का विरोध जताया, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। मौके पर एसडीएम मयंक भारद्वाज, तहसीलदार भूमिका लांबा, एसीपी (सदर) अशोक कुमार और महिला थाना प्रभारी सुनीता सहित पुलिस बल मौजूद रहा।

हालांकि गांव के लोग मौके से नदारद दिखे। अर्थ मूवर मशीनों की मदद से भूमि समतल करने और मार्ग पर गिट्टी-मिट्टी बिछाने का काम जारी है। इससे एक दिन पहले, मंगलवार दोपहर बाद, निर्माण कार्य शुरू कराने पहुंची पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई थी, जिसमें पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इस झड़प में सात लोग जिनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं घायल हो गए, जिन्हें बादशाह खान अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस ने मौके से 15 किसानों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। एसडीएम भारद्वाज के अनुसार, ग्रामीणों को पहले नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। समझाने के प्रयास विफल रहने पर मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी गई, फिर भी किसान अड़े रहे, जिसके बाद गिरफ्तारियां हुईं। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई गई है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाले 32 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) सेक्टर-65 में करा रहा है। विवादित भूमि सोतई गांव की जाट पट्टीशामलात भूमि है, जिस पर किसान लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं और उनका कब्जा है।

किसानों का आरोप है कि NHAI ने अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं दिया है। भूमि अर्जन अधिकारी ने मुआवजे की राशि कोर्ट में जमा करा रखी है, और इसी राशि पर नगर निगम ने भी दावा ठोक दिया है। NHAI का पक्ष है कि मुआवजा कोर्ट में जमा है और कोर्ट जिस पक्ष को भूमि का हकदार बताएगा, उसे भुगतान कर दिया जाएगा। दूसरी ओर किसानों की मांग है कि चूंकि भूमि पर वर्तमान में उनका कब्जा और खेती है, इसलिए मुआवजा पहले उन्हें ही मिलना चाहिए।

हाल ही में 12 गांवों की एक पंचायत हुई थी, जिसमें प्रस्ताव पारित किया गया था “मुआवजा नहीं तो कब्जा नहीं।” इसी फैसले के तहत ग्रामीणों ने पहले निर्माण कार्य रुकवा दिया था। यह मामला विधानसभा के मानसून सत्र में भी गूंजा था, जब विधायक रघुबीर सिंह तेवतिया ने सरकार से किसानों को मुआवजा दिलाने और मामले में दोषी पाए गए भूमि अर्जन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी।

फिलहाल प्रशासन और किसानों के बीच टकराव जारी है, और बुधवार की कार्रवाई से यह साफ है कि निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन पुलिस बल के सहारे आगे बढ़ रहा है, जबकि किसान मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं।

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Author: Prime Haryana

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