नई दिल्ली/मुंबई, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। देशभर में छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बिहार और असम के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने भी छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को राज्य के गृह विभाग को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

मुख्यमंत्री का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले बिहार और असम सरकारें भी प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की घोषणा कर चुकी हैं। ऐसे में महाराष्ट्र देश का तीसरा राज्य बन गया है जिसने इस दिशा में कदम उठाया है।
इधर, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास (क्रिमिनल एंटीसिडेंट) नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पड़ सकती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, परीक्षा संबंधी मुद्दों, विशेष रूप से नीट (NEET) पेपर लीक से जुड़े विरोध प्रदर्शनों पर दायर विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग और छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए गए थे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी जांच में निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए, ताकि भविष्य में होने वाली जांच प्रभावित न हो।
महाराष्ट्र सरकार के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को छात्र समुदाय के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में गंभीर आपराधिक आरोप या हिंसा से जुड़े ठोस साक्ष्य मौजूद हैं, उनकी जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी। देशभर में इस घटनाक्रम पर छात्रों, शिक्षाविदों और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
