CJP Protest : छात्रों के समर्थन में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बनाया ₹1 करोड़ का लीगल फंड,

नई दिल्ली(प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों के बीच एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ रुपये के विशेष लीगल फंड की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि केवल प्रदर्शनकारियों की कानूनी सुरक्षा और उनके खिलाफ होने वाली कथित अनुचित कार्रवाई के मामलों में इस्तेमाल की जाएगी।

kapil sibal with CJP leaders

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिब्बल ने कहा कि फंड का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं होगा और इसके वितरण में उनकी कोई भूमिका नहीं रहेगी। उन्होंने बताया कि फंड का संचालन संबंधित टीम द्वारा पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। इस दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है।

उनका दावा था कि असम, पश्चिम बंगाल और बिहार सहित कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई हैं और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए वकीलों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी गई कि जल्द ही एक वेबसाइट शुरू की जाएगी, जहां जिला स्तर पर जनहित के मामलों में काम करने वाले अधिवक्ता स्वयं को पंजीकृत कर सकेंगे।

इसके माध्यम से जरूरत पड़ने पर संबंधित जिले में प्रदर्शनकारियों को तुरंत कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों ने यह भी घोषणा की कि कथित पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े फोटो, वीडियो और अन्य साक्ष्य एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एकत्र किए जाएंगे। उनका कहना था कि इन साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई जाएंगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अन्य वक्ताओं ने दावा किया कि 25 जुलाई को सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने तथा भविष्य में नई एफआईआर दर्ज नहीं करने को लेकर सहमति बनी थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार की ओर से लिखित समझौते का इंतजार किया जा रहा है।

वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सहमति के अनुसार कार्रवाई नहीं हुई और गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया गया तो आंदोलन को दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका केवल कानूनी सहायता तक सीमित है और वे किसी राजनीतिक गतिविधि का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ अनुचित कार्रवाई होती है तो उन्हें कानून के दायरे में रहकर हरसंभव कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।

प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब में वक्ताओं ने कहा कि उनकी मांग केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि जहां भी पेपर लीक या छात्रों से जुड़े मामलों में लापरवाही हुई है, वहां सभी सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

Prime Haryana
Author: Prime Haryana

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