दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र मुद्दों को सीधे चुनावी एजेंडे से जोड़ने की कोशिश के तहत एनएसयूआई ने ‘मेरा कैंपस, मेरा घोषणापत्र’ अभियान तेज कर दिया है. संगठन के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के दौरान इस अभियान के तहत छात्रों से करीब 6,000 सुझाव प्राप्त हुए हैं. इन सुझावों के आधार पर एनएसयूआई छात्र-केंद्रित घोषणापत्र तैयार करने की तैयारी कर रहा है.
कॉलेजों में पहुंचकर जुटाए जा रहे छात्रों के सुझाव
अभियान के तहत एनएसयूआई की अलग-अलग कॉलेज इकाइयों की टीमें छात्रों से सीधे मुलाकात कर रही हैं. इस दौरान छात्रों के सामने मौजूद समस्याओं, उनकी चिंताओं और विश्वविद्यालय तथा कॉलेज स्तर पर जरूरी बदलावों को लेकर चर्चा की जा रही है. सुझाव पेटियों के माध्यम से भी छात्रों की राय एकत्र की जा रही है. छात्रों ने अपने सुझावों के जरिए उन मुद्दों को सामने रखा है, जिन पर वे अपने कॉलेजों और दिल्ली विश्वविद्यालय में बदलाव देखना चाहते हैं. अब एनएसयूआई इन सभी सुझावों का विश्लेषण करेगा.
छात्रों की प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार होगा घोषणापत्र
एनएसयूआई का कहना है कि प्राप्त सुझावों को केवल औपचारिक रूप से एकत्र नहीं किया जाएगा, बल्कि उनका विश्लेषण कर छात्रों की प्राथमिकताओं, अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को घोषणापत्र में शामिल करने की कोशिश की जाएगी. संगठन का लक्ष्य ऐसा छात्र-केंद्रित घोषणापत्र तैयार करना है, जिसकी दिशा सीधे छात्रों की ओर से मिले सुझावों से तय हो.
छात्रों की आवाज को मिलेगा सीधा स्थान
एनएसयूआई के मीडिया प्रभारी रवि पांडेय ने कहा, ‘मेरा कैंपस, मेरा घोषणापत्र’ छात्रों को एजेंडे के केंद्र में रखने की एक पहल है. केवल एक सप्ताह में लगभग 6,000 सुझाव प्राप्त होना दर्शाता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र अपनी आवाज को मजबूती से सामने रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि संगठन हर सुझाव का विश्लेषण करेगा और अंतिम घोषणापत्र में छात्रों की वास्तविक समस्याओं और उनकी आकांक्षाओं को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा. पांडेय के अनुसार, यह घोषणापत्र छात्रों के लिए नहीं, बल्कि छात्रों द्वारा तैयार किया जाएगा.
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आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा अभियान
उन्होंने बताया कि ‘मेरा कैंपस, मेरा घोषणापत्र’ अभियान आने वाले दिनों में भी दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों में जारी रहेगा. संगठन की टीमें अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचने और उनकी चिंताओं व सुझावों को व्यापक छात्र एजेंडे में शामिल करने का प्रयास करेंगी.
एनएसयूआई का मानना है कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकताएं छात्रों के साथ संवाद और उनकी भागीदारी के आधार पर तय होनी चाहिए. संगठन के मुताबिक, यह अभियान दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए अधिक समावेशी, जवाबदेह और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
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