रोजगार को लेकर नीति आयोग की रिपोर्ट पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने दावा किया कि देश में बेरोजगारी दर पिछले 40 सालों में सबसे अधिक है, जिससे युवाओं में निराशा है. उन्होंने सरकार पर मैन्युफैक्चरिंग और MSME को नरजअंदाज करने का आरोप लगाया. कांग्रेस सासंद ने कहा कि कृषि, छोटे व्यवसायों समेत कई ऐसे मुद्दे हैं, जिसे उनकी पार्टी समय से उठाती रही है.
नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 29 साल की उम्र के करीब 8.7 करोड़ भारतीय युवा ऐसे हैं, जो न पढ़ाई कर रहे हैं, न काम कर रहे हैं और न ही किसी तरह की ट्रेनिंग ले रहे हैं. आयोग ने इसे चुनौती बताते हुए युवाओं के लिए सस्ती या सब्सिडी वाली ट्रेनिंग, स्वरोजगार के अवसर, स्थानीय जरूरतों के हिसाब से स्किलिंग कार्यक्रम बढ़ाने की जरूरत बताई. विपक्ष इसे केंद्र सरकार की विफलता बता रहा है.
’40 सालों में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा’
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, ‘हम पहले से ही जानते हैं कि पिछले 40 सालों में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा है. यह साफ है कि युवाओं में बहुत बेचैनी, निराशा और हताशा है. हमने इसे छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों में देखा है. यह एक नाकाम शिक्षा व्यवस्था और पिछले 12 सालों में नौकरी के अवसर पैदा न होने का नतीजा है. मैन्युफैक्चरिंग और MSME पर कोई जोर नहीं दिया गया. कुछ ऐसी नीतियां हैं जो छोटे व्यवसायों, नौकरी देने वालों और यहां तक कि कृषि क्षेत्र को भी कमजोर कर रही हैं. मुझे लगता है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे हम कुछ समय से उठाते रहे हैं.’
रोजगार को लेकर नीति आयोग की रिपोर्ट
नीति आयोग ने देश के कार्यबल और छात्रों को बेहतर प्रभाव के लिए पांच कैटेगरी में बांटा है. इनमें स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, औपचारिक एवं अनौपचारिक और शिक्षा, रोजगार और ट्रेनिंग नहीं लेने वाले युवाओं का वर्ग और महिलाएं शामिल हैं. नीति आयोग ने कहा, ‘शिक्षा, रोजगार और ट्रेनिंग नहीं लेने वाले युवा आय के अभाव और पहले की शिक्षा पर हुए खर्च के कारण कई चुनौतियों का सामना करते हैं. छात्र अक्सर अपनी मौजूदा आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ शुल्क आधारित कौशल प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर पाते हैं.’
रिपोर्ट में कहा गया कि शिक्षा, रोजगार और ट्रेनिंग नहीं लेने वाले युवाओं और महिलाओं के लिए किफायती या सब्सिडी वाले प्रशिक्षण विकल्पों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है. इसमें कहा गया कि खासकर कम आय वाले परिवारों के स्टूडेंट पहले ही कॉलेज के शुल्क और कई मामलों में प्राइवेट ट्यूशन के खर्च से दबाव में रहते हैं. ऐसे में पारंपरिक डिग्री के साथ स्किल ट्रेनिंग में और खर्च करना कई लोगों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं हो पाता है.
