राष्ट्रीय राजधानी में इन्फ्लूएंजा-ए और H1N1 (स्वाइन फ्लू) के मामले बढ़ने लगे हैं, जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं. हालांकि, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने शुक्रवार (21 अगस्त) को कहा कि शहर मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में वृद्धि से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.
शहर में इस वर्ष अब तक इन्फ्लूएंजा-ए के 2,392 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1,777 स्वाइन फ्लू के मामले शामिल हैं. स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि केवल बृहस्पतिवार को ही H1N1 के 114 मामले सामने आए.
स्वास्थ्य तैयारियों को लेकर हुई बैठक
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने लोगों को आश्वस्त किया है कि सरकार इस तरह के मामलों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. सिंह ने मौसमी इन्फ्लूएंजा और मच्छर जनित बीमारियों से निपटने से संबंधित दिल्ली की तैयारियों की समीक्षा के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में हिस्सी लिया.
स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया आंकड़ा
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बृहस्पतिवार को इन्फ्लूएंजा के कुल 159 मामले सामने आए. इनमें से 155 इन्फ्लुएंजा-ए के मामले थे. इनमें 114 स्वाइन फ्लू, दो H1, एक H3 और 38 अन्य इन्फ्लुएंजा-ए के मामले सामने आए थे. इन्फ्लूएंजा-बी के भी चार मामले सामने आए हैं.
इस साल दिल्ली में दर्ज किए गए इन्फ्लूएंजा के कुल 2,602 मामलों में 2,392 इन्फ्लूएंजा-ए के मामले और 210 इन्फ्लूएंजा-बी के मामले शामिल हैं. इन्फ्लुएंजा-ए के मामलों में 1,777 स्वाइन फ्लू, 37 एच1, 138 एच3 और 440 अन्य मामले हैं.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- पूरी है तैयारी
बैठक के बाद जारी एक आधिकारिक बयान में सिंह ने कहा कि राजधानी में बिस्तरों, डॉक्टरों, दवाओं या आवश्यक मेडिकल उपकरणों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि मरीजों की संख्या पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकताओं के अनुसार अस्पताल की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. आधिकारिक बयान के अनुसार, दिल्ली राज्य स्वास्थ्य मिशन, एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के माध्यम से गहन निगरानी बनाए हुए है. इसके तहत IDSP-IHIP पोर्टल (एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच) के जरिए रिपोर्ट किए गए इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (ILI), गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) और इन्फ्लूएंजा के मामलों की हर दिन निगरानी की जा रही है और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नियमित अपडेट साझा किए जा रहे हैं.
और क्या-क्या तैयारियां की गई हैं?
बयान में कहा गया कि मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारियों, जिला निगरानी अधिकारियों और अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वो ILI, SARI और इन्फ्लूएंजा के मामलों की पहचान कर जांच करें और सरकार को रिपोर्ट करें. इसके साथ ही निगरानी के लिए आवश्यक परामर्श जारी करने के लिए कहा गया है. इसके अलावा स्वास्थ्य कर्मचारियों को को ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वो मीजों के लक्षणों को पहचान सकें और फॉलो-अप प्रोटोकॉल को समझ सकें, जबकि जिला अधिकारियों के लिए हाल में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था ताकि वो भी निगरानी व्यवस्था को समझ सकें.
विभिन्न विभागों को निर्देश
बयान में बताया गया कि दिल्ली नगर निगम (MCD), नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC), दिल्ली छावनी बोर्ड, शिक्षा विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और अन्य हितधारकों की बैठक में निर्देश दिए गए हैं कि इन्फ्लूएंजा की रोकथाम और नियंत्रण पर जन जागरूकता तथा सूचना, शिक्षा और संचार (IIC) गतिविधियों को तेज किया जाए. इसका उद्देशय लोगों तक बिमारी से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाना है.
दिल्ली में बढ़े डेंगू और मलेरिया के मामले
वहीं, दिल्ली में इस वर्ष डेंगू के 246 और मलेरिया के 80 मामले सामने आए हैं. हालांकि, अभी तक इन दोनों बिमारी से किसी की मौत नहीं हुई है. इसके अलावा चिकनगुनिया के मामले 19 सामने आये है.
बयान में बताया गया कि वेक्टर-नियंत्रण उपायों के तहत स्थानीय निकायों ने 3.20 लाख घरों में छिड़काव किया गया है. मच्छर का लार्वा मिलने वाले 91,217 घरों की पहचान कर 74,591 घरों को कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं और 6,724 पर कार्रवाई शुरू की गई है.
आशा कार्यकर्ताओं के जरिए जागरुकता अभियान
इसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार रोकथाम और नियंत्रण के लिए एमसीडी, एनडीएमसी, दिल्ली छावनी बोर्ड और अन्य विभागों के साथ समन्वय कर रही है, जबकि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से डेंगू और मलेरिया की निगरानी, प्रशिक्षण, जागरूकता और घर-घर जाकर संपर्क अभियान जारी है.
सिंह ने कहा कि दिल्ली की पूरी तैयारी रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ साझा की गई है, जिसमें बिस्तरों, डॉक्टरों, दवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था शामिल है. उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया है कि केंद्र हर संभव सहायता प्रदान करेगा.
लोगों से अपील
सिंह ने नागरिकों से भीड़भाड़ वाले स्थानों में मास्क का उपयोग करने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने, श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के संपर्क से बचने और खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टरों से परामर्श करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, ‘जनस्वास्थ्य की तैयारी एक सतत प्रक्रिया है. हमारी प्राथमिकता शुरुआती पहचान, समय पर इलाज और अस्पताल की पर्याप्त क्षमता सुनिश्चित करना है.’
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