फरीदाबाद में 800 करोड़ रुपये से बनेंगे तीन CETP, औद्योगिक प्रदूषण पर लगेगी लगाम

फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। शहर की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक (केमिकल युक्त) अपशिष्ट जल के निस्तारण के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से फरीदाबाद में तीन कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) स्थापित करेगा। इस परियोजना के पूरा होने से केमिकल युक्त पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा, जिससे भूमि, भूजल और फसलों को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद है।

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वर्तमान में अधिकांश औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट जल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की पाइपलाइन में ही पहुंच जाता है। इससे एसटीपी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसके उपकरणों को भी नुकसान होता है। नई योजना के तहत सीईटीपी के लिए अलग पाइपलाइन बिछाई जाएगी, ताकि औद्योगिक अपशिष्ट जल और घरेलू सीवेज को अलग-अलग ट्रीट किया जा सके।

फरीदाबाद में करीब 25 हजार औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। इनमें से कुछ बड़े उद्योग अपने स्तर पर अपशिष्ट जल का उपचार करते हैं, लेकिन अधिकांश इकाइयों के पास ऐसी व्यवस्था नहीं है। कई स्थानों पर केमिकल युक्त पानी खुले में छोड़े जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, जिससे भूजल प्रदूषित होने का खतरा बना रहता है।

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में एक एसटीपी में प्रतिदिन 100 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) से अधिक पानी का उपचार किया जाता है, जिसमें औद्योगिक अपशिष्ट भी शामिल होता है। अलग सीईटीपी बनने के बाद एसटीपी पर दबाव कम होगा और उसकी कार्यक्षमता व आयु दोनों में सुधार होगा। साथ ही नालों से आने वाले दूषित पानी का भी बेहतर ढंग से उपचार किया जा सकेगा।

योजना के तहत प्रतापगढ़, मिर्जापुर और बादशाहपुर स्थित एसटीपी परिसरों के साथ तीन सीईटीपी विकसित किए जाएंगे। सबसे पहले प्रतापगढ़ में परियोजना के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इस संबंध में मेयर की अध्यक्षता में हुई बैठक में सहमति बन चुकी है और नगर निगम ने एचएसआईआईडीसी को भूमि की निशानदेही भी सौंप दी है।

प्रत्येक सीईटीपी की क्षमता 50 एमएलडी होगी। इस तरह तीनों संयंत्र मिलकर प्रतिदिन 150 एमएलडी केमिकल युक्त पानी का उपचार कर सकेंगे। उपचारित पानी को निर्धारित मानकों के अनुसार यमुना में छोड़ा जाएगा, जिससे नदी के पर्यावरण और जलीय जीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

एचएसआईआईडीसी के प्रोजेक्ट मैनेजर पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि प्रतापगढ़ एसटीपी के साथ बनने वाले पहले सीईटीपी के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं नगर निगम के कार्यकारी अभियंता नितिन कादियान ने कहा कि जमीन की निशानदेही का कार्य पूरा हो चुका है। उनका मानना है कि औद्योगिक अपशिष्ट जल के अलग उपचार की व्यवस्था होने से एसटीपी पर भार कम होगा और उसकी कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहेगी।

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Author: Prime Haryana

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