फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। जिला रजिस्ट्रार (फर्म एंड सोसाइटी) मोहित गर्ग ने जिले की समस्त सोसाइटियों, समितियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और सभाओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ सोसाइटी एक्ट-2012 की सभी अनिवार्य शर्तों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।

वार्षिक रिटर्न की अंतिम तिथि 31 मई
मोहित गर्ग ने बताया कि एक्ट की धारा 50(1) के तहत जिले में पंजीकृत प्रत्येक संस्था को अपनी वार्षिक रिटर्न प्रतिवर्ष **31 मई से पहले** जिला रजिस्ट्रार कार्यालय (फर्म एंड सोसाइटी), फरीदाबाद में ऑनलाइन माध्यम से जमा करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में संस्था की वार्षिक गतिविधियों, आय-व्यय का विवरण तथा अन्य प्रशासनिक जानकारियां शामिल होती हैं। जो संस्थाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल नहीं करेंगी, उन पर एक्ट के प्रावधानों के तहत भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
कार्यकारिणी का अनुमोदन भी जरूरी
जिला रजिस्ट्रार ने यह भी स्पष्ट किया कि एक्ट की धारा 39 के अनुसार प्रत्येक पंजीकृत संस्था की कार्यकारिणी (Executive Body) का अनुमोदन कम से कम हर तीन वर्ष में एक बार जिला रजिस्ट्रार कार्यालय से करवाना अनिवार्य है। बिना अनुमोदन के कार्यरत कार्यकारिणी को वैध नहीं माना जाएगा और ऐसी संस्थाओं के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
ऑनलाइन प्रक्रिया को प्राथमिकता दें
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा उपलब्ध कराई है। सभी संस्थाएं घर बैठे ही अपनी वार्षिक रिटर्न और कार्यकारिणी अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं। उन्होंने अपील की कि संस्थाएं अंतिम तिथि का इंतजार न करें और जल्द से जल्द अपनी औपचारिकताएं पूरी करें।
नियम न मानने पर होगी सख्त कार्रवाई
मोहित गर्ग ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी सोसाइटी, आरडब्ल्यूए या सभा हरियाणा सरकार के इन निर्देशों की अनुपालना नहीं करेगी, उसके विरुद्ध हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ सोसाइटी एक्ट-2012 के तहत विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस कार्रवाई की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी। उन्होंने कहा कि कानून का पालन करना न केवल कानूनी बाध्यता है, बल्कि संस्था के सुचारु संचालन और सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए भी आवश्यक है।