फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने राजस्थान एसोसिएशन फरीदाबाद के नव-नियुक्त शासी मंडल एवं कार्यकारिणी 2026–2027 के शपथ ग्रहण एवं आशीर्वाद समारोह में सहभागिता की। यह गरिमामय आयोजन राजस्थान भवन, सेक्टर-10 फरीदाबाद में समाज के गणमान्य अतिथियों, पदाधिकारियों, मातृशक्ति और युवा साथियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

संस्कार और परंपरा का अवसर
अपने संबोधन में विपुल गोयल ने कहा कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि संस्कार, परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि राजस्थान समाज एक जीवन-दृष्टि है, जिसकी पहचान परिश्रम, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता से होती है। देश के जिस भी क्षेत्र में राजस्थान समाज ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, वहाँ विकास, समृद्धि और सांस्कृतिक संतुलन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर
कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि राजस्थान की लोकसंस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, भाषा और जीवनशैली भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं। देश की अनेक लोक परंपराओं पर राजस्थान की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो हमारी साझा विरासत को और अधिक समृद्ध बनाती है।
उन्होंने राजस्थान को वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति की भूमि बताते हुए कहा कि यहाँ के वीरों ने सदैव देश की आन-बान-शान की रक्षा की है। यह भूमि समर्पण, संस्कृति और विरासत का प्रतीक है, जिसने भारत की पहचान को सुदृढ़ किया है।
शपथ ग्रहण का महत्व
विपुल गोयल ने कहा कि शपथ ग्रहण केवल पदभार ग्रहण नहीं बल्कि समाज सेवा, निष्ठा और नेतृत्व का संकल्प है। यह अवसर समाज को संगठित करने, युवाओं को प्रेरित करने और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की जिम्मेदारी का बोध कराता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान समाज की शक्ति उसकी एकता और सेवा भावना में निहित है।
शुभकामनाएं और विश्वास
अंत में कैबिनेट मंत्री ने नव-नियुक्त शासी मंडल एवं कार्यकारिणी को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक सहयोग, समर्पण और सेवा भाव के साथ राजस्थान एसोसिएशन फरीदाबाद संगठन को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। यह समारोह न केवल पदाधिकारियों के लिए जिम्मेदारी का संकल्प था, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना। राजस्थान समाज की परंपराओं और संस्कृति को आगे बढ़ाने का यह संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
