रोहतक। पीजीआईएमएस रोहतक के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति का मामला इन दिनों चर्चा में है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास नियुक्ति प्रक्रिया में योग्यता और राजनीतिक सिफारिश के मुद्दे पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं।
मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डॉ. मित्तल की तीन साल की पुनर्नियुक्ति से संबंधित 3 अगस्त 2026 के आदेश और 6 अगस्त के कार्यकारी परिषद के प्रस्ताव के संचालन पर रोक लगाई है। यह मामला डॉ. अनिल पन्निकर की याचिका के बाद अदालत के सामने आया।
रिपोर्टों के अनुसार, डॉ. मित्तल के सेवा विस्तार की सिफारिश पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता मनीष कुमार ग्रोवर की ओर से की गई थी। सामने आए पत्र में डॉ. मित्तल को कुशल प्रशासक और अच्छे चिकित्सक बताते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं तथा जमीनी स्तर के स्वयंसेवकों की मदद का भी उल्लेख किया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी वैधानिक पद पर नियुक्ति के लिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मदद जैसी बातें प्रासंगिक आधार नहीं हो सकतीं। अदालत ने विश्वविद्यालय के नियमों में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट पद के लिए 58 वर्ष की आयु सीमा का भी उल्लेख किया और कहा कि कार्यकारी परिषद के पास इस वैधानिक शर्त में छूट देने का अधिकार नहीं था।
मामले ने हरियाणा सरकार के उस सार्वजनिक दावे के संदर्भ में भी चर्चा पैदा की है, जिसमें सरकारी नौकरियों और नियुक्तियों में ‘बिना खर्ची-बिना पर्ची’ व्यवस्था की बात कही जाती रही है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की आगे की सुनवाई और विश्वविद्यालय द्वारा की जाने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। अगली सुनवाई 4 मार्च 2027 को निर्धारित बताई गई है।
