Xप्लेन: मेटा का बड़ा फैसला, अब रात 12 से सुबह 6 बजे तक नहीं चला सकेंगे इंस्टा-फेसबुक


मेटा (Meta) ने बच्चों और टीनेजर्स पर इंस्टाग्राम और फेसबुक के बुरे प्रभावों से जुड़े मुकदमों को खत्म करने के लिए अमरीकी राज्यों के साथ 10 सालों में $17 बिलियन (लगभग ₹1.4 लाख करोड़) चुकाने का ऐतिहासिक समझौता किया है.

कैलिफ़ोर्निया के ओकलैंड में चल रहे इस फेडरल केस में राज्यों का मुख्य आरोप था कि मेटा ने जानबूझकर अपने ऐप्स को इस तरह से बनाया ताकि बच्चों को इनकी लत लग जाए, उनके प्राइवेसी डेटा का गलत इस्तेमाल किया और इसके नुकसानों को दुनिया से छिपाया.

तकनीक नीति और कानून के नजरिए से यह सिर्फ एक वित्तीय समझौता नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया के काम करने के तरीके और उसके डिजाइन को बदलने वाला एक बड़ा मोड़ है.

1. अमरीकी राज्यों ने मेटा पर क्या आरोप लगाए थे?

2021 से शुरू हुई जांच के बाद 2023 में 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने मिलकर मेटा पर मुकदमा दर्ज किया था. राज्यों के मुख्य आरोप निम्नलिखित थे:

  • लत लगाने वाले फीचर्स (Addictive Features): मेटा ने ऐप्स में इनफिनिट स्क्रॉल, ऑटोप्ले, पुश नोटिफिकेशन्स, लाइक्स और ब्यूटी फिल्टर जैसे फीचर्स जानबूझकर शामिल किए. इनका मकसद टीनेजर्स के दिमाग की कमजोरियों का फायदा उठाकर ऐप पर उनका समय बढ़ाना था.

  • रिसर्च छिपाना: मेटा की अपनी अंदरूनी रिसर्च में पाया गया था कि इंस्टाग्राम के इस्तेमाल से युवाओं में डिप्रेशन, चिंता और बॉडी-इमेज से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. इसके बावजूद कंपनी ने सार्वजनिक रूप से इन खतरों को कम करके दिखाया.

  • बच्चों की प्राइवेसी का उल्लंघन: माता-पिता की सहमति के बिना 13 साल से कम उम्र के बच्चों का निजी डेटा इकट्ठा किया गया, जो बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी के कानूनों (COPPA) का उल्लंघन था.

  • कानूनी कवच (Section 230) की सीमा: आमतौर पर ‘कम्युनिकेशंस डिसेंसी एक्ट’ की धारा 230 टेक कंपनियों को यूज़र्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री की जिम्मेदारी से बचाती है. लेकिन राज्यों ने मेटा पर यूज़र कंटेंट के लिए नहीं, बल्कि कंपनी के अपने प्रोडक्ट डिजाइन और भ्रामक बिज़नेस मॉडल के लिए केस दर्ज किया. राज्यों ने मेटा के मॉडल को 4 शब्दों में समेटा-“हुक” (आकर्षित करना), “होल्ड” (बनाए रखना), “हार्वेस्ट” (डेटा इकट्ठा करना) और “हाइड” (नुकसान छिपाना).

2. ओकलैंड समझौते के अलावा अन्य कानूनी मामले

मेटा केवल इस $17 बिलियन के समझौते से पूरी तरह से मुक्त नहीं हुई है. इसके अलावा दो अन्य महत्वपूर्ण मामले चल रहे हैं:

  • लॉस एंजिल्स (कैलिफ़ोर्निया कोर्ट): जूरी ने माना कि मेटा और गूगल के ऐप्स के डिजाइन की वजह से एक टीनएजर की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा. कोर्ट ने मेटा पर $4.2 मिलियन और गूगल पर $1.8 मिलियन का जुर्माना लगाया. यह राशि भले छोटी दिखे, लेकिन ऐसे ही हजारों व्यक्तिगत मुकदमों के लिए यह एक मिसाल बन गई है.

  • न्यू मैक्सिको केस: बच्चों की सुरक्षा से जुड़े एक अलग मामले में न्यू मैक्सिको राज्य ने मेटा के खिलाफ $900 मिलियन से ज्यादा का फैसला अपने पक्ष में कराया है, जिसे मेटा ऊपरी अदालत में चुनौती दे रही है.

3. समझौते के बाद Instagram और Facebook में क्या बदलाव आएंगे?

जज यवोन गोंजालेज रोजर्स की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद, 18 साल से कम उम्र के टीनेजर्स के लिए निम्नलिखित बदलाव अपने आप (Default Settings) लागू हो जाएंगे-

  • रोजाना 2 घंटे की समय सीमा: दोनों ऐप्स मिलाकर टीनेजर्स रोजाना केवल 2 घंटे ही ऐप इस्तेमाल कर सकेंगे. इसे बढ़ाने या हटाने का अधिकार सिर्फ माता-पिता के पास होगा.

  • नाइट मोड और स्कूल टाइम ब्लॉक: आधी रात से सुबह 6 बजे तक ऐप्स पूरी तरह ब्लॉक रहेंगे. स्कूल के समय (सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक) सभी नोटिफिकेशन्स बंद (Mute) रहेंगे (केवल डायरेक्ट मैसेज को छोड़कर).

  • स्क्रॉलिंग ब्रेक: लगातार 15 मिनट तक स्क्रॉल करने पर ऐप इस्तेमाल रोकने का प्रॉम्प्ट/मैसेज दिखेगा.

  • बिना एल्गोरिदम की फ़ीड: बिना पर्सनलाइज्ड फीड (साधारण क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर) चुनने का विकल्प मिलेगा.

  • लाइक्स और फिल्टर्स पर रोक: टीनेजर्स के अकाउंट्स पर ‘लाइक’ की गिनती डिफ़ॉल्ट रूप से छिपी रहेगी और कॉस्मेटिक सर्जरी वाले भारी मेकअप फिल्टर्स पूरी तरह बैन होंगे.

  • उम्र का सही पता लगाना: 13 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐप्स से दूर रखने के लिए सख्त एज-वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा.

डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स का महत्व: सबसे बड़ी बात यह है कि ये फीचर्स यूज़र को ढूंढकर ऑन नहीं करने पड़ेंगे, बल्कि यह ऐप में पहले से ही चालू (Default) मिलेंगे. इससे सुरक्षा की जिम्मेदारी यूज़र या माता-पिता के बजाय सीधे प्लेटफॉर्म पर आ जाती है.

4. पैसे से ज्यादा ‘डिजाइन’ का महत्व क्यों है?

10 वर्षों में $17 बिलियन की राशि सुनने में बहुत बड़ी लगती है, लेकिन यह मेटा की इसी अवधि की अनुमानित कमाई का मात्र 1% है. कंपनी ने अपने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इससे उसके दीर्घकालिक वित्तीय स्वास्थ्य पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा. इसलिए, असली असर पैसे का नहीं बल्कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के डिजाइन में होने वाले बदलावों का है.

यह मामला दर्शाता है कि टेक कंपनियों को अब केवल कंटेंट के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ऐप्स की लत लगाने वाली बनावट  के लिए भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. यह फैसला भविष्य में टिकटॉक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए भी नए नियम तय करेगा.



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Prime Haryana
Author: Prime Haryana

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