फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। हरियाणा में बढ़ते शहरी कचरे की समस्या से निपटने और उसे ऊर्जा के स्रोत में बदलने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी योजना तैयार की है। प्रदेश के हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में चार इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के लिए संबंधित पक्षों के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

सरकार के मुताबिक चारों संयंत्रों के शुरू होने के बाद प्रतिदिन करीब 5 हजार टन शहरी कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जा सकेगा। इससे लगभग 50 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। सभी परियोजनाओं को अक्टूबर 2028 तक शुरू किए जाने की उम्मीद है। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि फरीदाबाद क्लस्टर में प्रतिदिन 1600 टन कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता वाला संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
इससे न्यूनतम 16 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन होने की उम्मीद है। तेजी से बढ़ते फरीदाबाद में कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिहाज से इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संयंत्र के शुरू होने के बाद खुले में कचरा डंप करने और उसके अवैज्ञानिक निपटान पर काफी हद तक अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही कचरे से बिजली उत्पादन के जरिए वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत को भी बढ़ावा मिलेगा।
चारों क्लस्टरों में इतनी होगी क्षमता
सरकार की योजना के अनुसार फरीदाबाद में प्रतिदिन 1600 टन कचरे का प्रसंस्करण होगा और न्यूनतम 16 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा।
हिसार क्लस्टर में 500 टन प्रतिदिन कचरे के प्रसंस्करण से न्यूनतम 5 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है।
अंबाला क्लस्टर में प्रतिदिन 900 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा, जिससे न्यूनतम 9 मेगावाट ऊर्जा पैदा होने की उम्मीद है।
गुरुग्राम क्लस्टर में सबसे अधिक 2000 टन प्रतिदिन कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता होगी और यहां न्यूनतम 20 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
इस तरह चारों संयंत्रों की कुल क्षमता 5 हजार टन प्रतिदिन कचरा प्रसंस्करण और 50 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन की होगी।
गीले कचरे से बायोगैस, सूखे कचरे से बनेगी ऊर्जा
प्रस्तावित संयंत्रों में कचरे की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। गीले कचरे से बायोगैस तैयार करने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, ऐसे सूखे कचरे को वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में भेजा जाएगा, जिसे दोबारा इस्तेमाल या रिसाइकल नहीं किया जा सकता। इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरे का अधिकतम उपयोग करना और उसके पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करना है।
स्रोत पर कचरा अलग करना होगा जरूरी
सरकार ने साफ किया है कि आधुनिक प्लांट लगाने के साथ-साथ नागरिकों की भागीदारी भी इस पूरी व्यवस्था की सफलता के लिए जरूरी होगी। घरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को स्रोत स्तर पर ही अलग-अलग करना महत्वपूर्ण होगा। मंत्री के अनुसार सरकार आधुनिक संयंत्र और वैज्ञानिक व्यवस्था उपलब्ध करा सकती है, लेकिन कचरा प्रबंधन को स्थायी रूप से सफल बनाने के लिए लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
पर्यावरणीय मानकों का रखा जाएगा ध्यान
सरकार के अनुसार प्रस्तावित परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। संयंत्रों की स्थापना ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुरूप किए जाने की बात कही गई है। वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रसंस्करण के साथ पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने का भी लक्ष्य है।
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगे फंडिंग
इन परियोजनाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से वित्तीय व्यवस्था की गई है। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अर्बन चैलेंज फंड के तहत इन परियोजनाओं को आर्थिक सहायता मिलने की योजना है। कुल पूंजीगत लागत में 25 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार एवं शहरी स्थानीय निकायों द्वारा वहन की जाएगी। शेष 50 प्रतिशत राशि ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा लगाई जाएगी।
कचरे के ढेर से ऊर्जा तक पहुंचाने की तैयारी
विपुल गोयल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शहरों में बढ़ते कचरे के ढेर को कम करने के साथ उसी कचरे का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में करना है। सरकार इसे ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विजन तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ, स्वस्थ और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है।
इन चारों संयंत्रों की स्थापना ऑयल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हरियाणा में कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक साथ बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
