स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की जेएनयू इकाई ने तिरंगा यात्रा निकाली. ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने और स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या के मौके पर आयोजित इस यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया. हाथों में तिरंगा लेकर छात्र पूरे परिसर में निकले और देशभक्ति के नारे लगाए.
तिरंगा यात्रा की शुरुआत बराक छात्रावास से हुई. यात्रा के दौरान जेएनयू परिसर में ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय हिंद’ के नारे गूंजते रहे. ABVP के मुताबिक, यात्रा के जरिए छात्रों ने देश की एकता और अखंडता के साथ संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई. इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों को भी याद किया गया.
‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने पर आयोजन
ABVP ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने वाला महत्वपूर्ण गीत रहा है. इसके 150 साल पूरे होने का यह मौका देश की सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद करने का भी अवसर है. संगठन के मुताबिक, तिरंगा यात्रा के जरिए छात्रों ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को लेकर भी संदेश दिया. यात्रा में शामिल छात्रों ने देश की एकता, अखंडता और संविधान के प्रति अपनी निष्ठा जताई.
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ABVP जेएनयू अध्यक्ष ने क्या कहा?
ABVP जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान करोड़ों लोगों के अंदर देशभक्ति की भावना जगाने का काम किया. उन्होंने कहा कि इसके 150 साल पूरे होने के मौके पर निकाली गई तिरंगा यात्रा युवाओं की देश के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाती है. मयंक पंचाल ने कहा कि जेएनयू का छात्र समाज राष्ट्रहित, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मूल्यों को मजबूत करने के लिए आगे भी काम करता रहेगा.
‘राष्ट्र प्रथम की भावना मजबूत करने का संदेश’
ABVP जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा कि तिरंगा देश की पहचान, गौरव और सम्मान का प्रतीक है. उनके मुताबिक, आज की तिरंगा यात्रा युवाओं के बीच ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को मजबूत करने का माध्यम बनी. उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने का अवसर स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेने का भी मौका है. इस मौके पर भारत को ज्ञान, संस्कृति और विकास के क्षेत्र में आगे ले जाने के संकल्प को दोहराया गया.
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