जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज, लेकिन पर्यटन और सामाजिक माहौल पर उठते सवाल

श्रीनगर/गुलमर्ग। जम्मू-कश्मीर में केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। विशेष रूप से सड़क संपर्क को बेहतर बनाने और घाटी के दूर-दराज क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पंजाब से जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में प्रवेश करते ही फोर-लेन सड़कों, फ्लाईओवरों और सुरंगों का निर्माण कार्य दिखाई देने लगता है, जो श्रीनगर तक जारी है।

आधुनिक सड़कों और सुरंगों ने आसान किया सफर

कठुआ से जम्मू और आगे श्रीनगर तक अधिकांश मार्ग फोर-लेन बन चुका है। केवल कुछ स्थानों पर ही निर्माण कार्य शेष दिखाई देता है। इस मार्ग पर कई लंबी सुरंगें बनाई गई हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर में उधमपुर और रामबन के बीच श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग जिसकी लम्बाई 9.28 किलोमीटर और बनिहाल और काज़ीगुंड के बीच बनिहाल-क़ाज़ीगुंड सड़क सुरंग जिसकी लम्बाई 8.45 किलोमीटर भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं ने यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुगम और आरामदायक बना दिया है।

रास्ते भर प्राकृतिक सौंदर्य की छटा

कठुआ से श्रीनगर तक के सफर में यात्रियों को खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं। रास्ते में सांबा, पुलवामा और अनंतनाग जैसे शहरों के अलावा छोटे-छोटे गांव भी पड़ते हैं। पारंपरिक शैली में बने मकान और खुले मैदान इस क्षेत्र की सुंदरता को और बढ़ाते हैं। अपेक्षाकृत कम जनसंख्या घनत्व के कारण कई स्थानों पर क्षेत्र शांत और कम भीड़भाड़ वाला दिखाई देता है।

श्रीनगर में पर्यटन गतिविधियां सीमित नजर आईं

राजधानी श्रीनगर पहुंचने पर शहर की चहल-पहल दिखाई देती है, लेकिन अन्य प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटन स्थलों जैसे शिमला, कुल्लू मनाली देहरादून की तुलना में यहां पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम महसूस होती है। ठहरने और खाने-पीने की सुविधाएं बजट के अनुरूप उपलब्ध हैं। विश्व प्रसिद्ध डल झील पर भी इस समय अपेक्षित भीड़ देखने को नहीं मिली।

 

यहाँ आने वाले पर्यटकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण पर्यटकों की संख्या प्रभावित हुई है। यहाँ की लोगों में भारत, हिन्दू, जय हिन्द, और भारत माता की जय जैसे नारों से सख्त नफरत दिखाई देती है।

गुलमर्ग में गाइड व्यवस्था और रोजगार की चुनौतियां

प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में प्रवेश के दौरान पर्यटकों को स्थानीय गाइडों की सेवाएं लेनी होती हैं। स्थानीय गाइड समीर ने बताया कि उनकी आय सीमित है और पर्यटन सीजन पर काफी हद तक निर्भर करती है। समीर ने बताया की की उनको दस बारह हजार रुपये मिलते हैं बाकि जो सैलानी टिप देते हैं वो ही उनकी आमदनी है, और टिप शायद ही कोई देता होगा।

गुलमर्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढकी पहाड़ियों और फिल्मी इतिहास के लिए भी प्रसिद्ध है। हिंदी सिनेमा के कई लोकप्रिय गीत और फिल्मों की शूटिंग यहां हुई है। राजेश खन्ना और मुमताज पर फिल्माया गया प्रसिद्ध गीत **“जय जय शिव शंकर”** भी गुलमर्ग क्षेत्र में बने मंदिर में शूट किया गया था, उस मंदिर के आलावा उस क्षेत्र में कोई गुलज़ार मंदिर या गुरुद्वारा दिखाई नहीं देता।

पर्यटन को नई उड़ान देने की जरूरत

हालांकि जम्मू-कश्मीर में सड़क, सुरंग और अन्य आधारभूत ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन पर्यटन क्षेत्र को उसकी पूरी क्षमता तक पहुंचाने के लिए अभी भी व्यापक प्रयासों की आवश्यकता महसूस होती है। बेहतर संपर्क व्यवस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के बावजूद पर्यटकों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं दिखाई दे रही है। वहां के लोगों का भारत और हिन्दुओं के प्रति नफरत, और आतंक का समर्थन इसका मुख्य कारण है।

 

Prime Haryana
Author: Prime Haryana

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