फरीदाबाद (सरूप सिंह)। सेक्टर-84 स्थित एक फ्लैट के किराया विवाद में हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए किरायेदार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने जिला अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि किराया न चुकाने की स्थिति में किरायेदार को बेदखल करना कानूनन उचित है। यह मामला फ्लैट मालिक जय प्रकाश गुप्ता और किरायेदार डॉ. सिमी अग्रवाल के बीच का है।

किरायेदार ने जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे बकाया किराया, ब्याज और अन्य खर्च जमा करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि हाई कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया। जिला अदालत ने 27 जनवरी 2025 को अपने आदेश में करीब 4.33 लाख रुपये जमा करने को कहा था। यह राशि अप्रैल 2023 से अगस्त 2024 तक के लगभग 16 महीने के बकाया किराये से जुड़ी है।
दोनों पक्षों के बीच 12 सितंबर 2022 को हुए किराया समझौते के अनुसार मासिक किराया 25 हजार रुपये तय था। किरायेदार की ओर से दावा किया गया कि मकान मालिक ने जबरन बेदखली के दौरान उसके सामान को नुकसान पहुंचाया, जिससे उसे भारी आर्थिक क्षति हुई, जिसे किराये में समायोजित किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि जिला अदालत ने बिना पर्याप्त सुनवाई के आदेश दिया।
हाई कोर्ट ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि किरायेदार ने स्वयं किराया संबंध, तय राशि और बकाया अवधि को स्वीकार किया है। ऐसे में किराया चुकाना उसकी जिम्मेदारी थी। अदालत ने यह भी कहा कि यदि नुकसान हुआ है तो उसके लिए अलग से कानूनी उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन इससे किराया न देने का अधिकार नहीं बनता। रिकॉर्ड के अनुसार, किराया जमा करने के लिए कई अवसर दिए गए थे, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
इसी आधार पर जिला अदालत ने बेदखली का आदेश दिया था, जिसे हाई कोर्ट ने सही ठहराया। अंततः अदालत ने कहा कि मामले में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है, इसलिए अपील खारिज की जाती है और जिला अदालत का फैसला यथावत रहेगा।