पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फैसले को पलटते हुए एक बुजुर्ग मां को उसके बेटे की ट्रेन दुर्घटना में मौत पर मुआवजा देने का आदेश दिया। जानिए पूरा मामला और कोर्ट की टिप्पणियां।
चंडीगढ़, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में रेलवे दावा अधिकरण के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसने ट्रेन से गिरकर मृत्यु को प्राप्त हुए एक युवक की मां के मुआवजा दावे को अस्वीकार कर दिया था। अदालत ने इस दौरान साफ शब्दों में कहा कि किसी यात्री पर लापरवाही का आरोप लगाकर रेलवे अपनी कानूनी जिम्मेदारी और मुआवजा भुगतान के दायित्व से बच नहीं सकता।

क्या था पूरा मामला?
यह घटना 3 जुलाई 2011 की है। राकेश नामक एक युवक जींद से बहादुरगढ़ की ओर ट्रेन में सफर कर रहा था। भीड़भाड़ भरी ट्रेन में अचानक तेज झटका लगने से वह ट्रेन से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के उसी दिन राजकीय रेलवे पुलिस (GRP), रोहतक ने डीडीआर (Daily Diary Report) दर्ज की थी।
न्यायमूर्ति हरकेश मनुजा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि मृतक के पास मिला रेल टिकट पूरी तरह वैध था और उसे संदिग्ध या जाली नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि प्रत्यक्षदर्शी न होने के बावजूद परिस्थितियां साफ बताती हैं कि यह एक ‘अवांछित घटना’ (Untoward Incident) थी।
पिता के दावेदार न होने पर भी मां का हक बरकरार
कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल इसलिए कि पिता को दावे में पक्षकार नहीं बनाया गया, मां के जायज दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के अनुसार, मां कानूनी तौर पर पूरी तरह आश्रित अभिभावक (dependent guardian) की श्रेणी में आती है और इस आधार पर उसका दावा पूरी तरह वैध है।
9% ब्याज सहित 4 लाख मुआवजे का आदेश
हाईकोर्ट ने रेलवे दावा अधिकरण के 19 सितंबर 2016 के पुराने आदेश को रद्द करते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि वह मृतक की मां को:
– 4 लाख रुपये की मूल मुआवजा राशि
– 9% वार्षिक साधारण ब्याज दावा दायर करने की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान तक
– यह पूरी राशि तीन महीने के भीतर अदा करे।
