फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. बाबू लाल ने किसानों को शीतलहर और पाले से फसलों को होने वाले नुकसान के प्रति सतर्क करते हुए बताया कि अत्यधिक ठंड के कारण फसलों में काली रतुआ, सफेद रतुआ, लेट ब्लाइट जैसी अनेक बीमारियां फैल जाती हैं, जिससे अंकुरण, वृद्धि, पुष्पण, उपज तथा भंडारण क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि शीतलहर फसलों की समग्र उत्पादकता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है, इसलिए समय पर उचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। डा. बाबू लाल ने शीतलहर से बचाव एवं उपचार के लिए किसानों को कई उपाय अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के साथ फास्फोरस व पोटेशियम का छिड़काव करने से जड़ों का बेहतर विकास होता है। शीतलहर के दौरान हल्की एवं बार-बार सतही सिंचाई तथा जहां संभव हो स्प्रिंकलर सिंचाई का प्रयोग लाभकारी रहता है।
उन्होंने ठंड एवं पाला प्रतिरोधी किस्मों की खेती, बागवानी में अंतर फसली खेती, सब्जियों की मिश्रित खेती तथा सरसों व अरहर जैसी लंबी फसलों को लगाने की सलाह दी, जिससे ठंडी हवाओं से सुरक्षा मिलती है। साथ ही नर्सरी एवं छोटे पौधों को प्लास्टिक ढक्कन, पुआल या सरकंडा घास की छप्पर से ढकने, जैविक मल्चिंग अपनाने तथा हवा की गति कम करने के लिए विंड ब्रेक/आश्रय बेल्ट लगाने पर भी जोर दिया, ताकि फसलों को शीतलहर और पाले से सुरक्षित रखा जा सके।