नई दिल्ली, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन (NBE) द्वारा नीट-पीजी 2025 की क्वालिफाइंग कटऑफ को घटाकर माइनस (-40) किए जाने के फैसले पर चिकित्सा जगत में उबाल आ गया है। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने इसे मेरिट की हत्या और शिक्षा व्यवस्था का मजाक करार दिया है। संगठन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास और महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि नीट-पीजी अब तक ज्ञान और मेहनत का प्रतीक थी, लेकिन कटऑफ को माइनस में ले जाना यह संदेश देता है कि अब ‘प्रतियोगिता’ नहीं, केवल ‘उपस्थिति’ काफी है। संगठन ने तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि नई व्यवस्था में रैंक केवल दिखावा रह गई है। यदि किसी छात्र के पास 2-3 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षमता है, तो शून्य या माइनस अंक होने पर भी उसे पीजी सीट मिल जाएगी।
निजी कॉलेजों को फायदा पहुंचाने का आरोप डॉ. व्यास ने चेतावनी दी कि यह फैसला केवल निजी मेडिकल संस्थानों की सीटें भरने और उन्हें अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए लिया गया है। इससे योग्य छात्रों का मनोबल तो टूटेगा ही, साथ ही भविष्य में कम योग्य डॉक्टर बनने से मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा होगा।
डीएमए की प्रमुख मांगें:
नीट-पीजी 2025 की संशोधित कटऑफ (माइनस 40) तुरंत वापस ली जाए।
मंत्रालय, एनएमसी (NMC) और मेडिकल संगठनों को मिलाकर एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित हो।
भविष्य में ऐसे बड़े बदलावों से पहले पारदर्शी चर्चा अनिवार्य की जाए।