नई दिल्ली,। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में योग्य और अनुभवी चिकित्सा शिक्षकों की कमी को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने केंद्र सरकार से नीतिगत बदलाव की मांग की है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु सीमा को समाप्त करने या उसमें पर्याप्त बढ़ोतरी करने का सुझाव दिया है।

डीएमए की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी और राष्ट्रीय मुख्य सदस्य डॉ. आर्यन श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं का उपयोग किया जाना चाहिए। पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के अध्यक्ष को भी भेजी गई है।
डीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा को केवल नए मेडिकल कॉलेज, भवन और सीटें बढ़ाकर मजबूत नहीं किया जा सकता। इसके लिए अनुभवी और योग्य शिक्षकों की भी आवश्यकता होती है। उनके अनुसार वरिष्ठ शिक्षक विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ लंबे चिकित्सकीय, व्यावहारिक और शैक्षणिक अनुभव से भी परिचित कराते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षक स्वस्थ, सक्षम, योग्य और पढ़ाने के लिए इच्छुक है, तो केवल उम्र के आधार पर उसकी सेवाओं को समाप्त करने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। डीएमए ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर ऐसे शिक्षकों को 75 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति देने का सुझाव दिया है। संगठन का कहना है कि सेवा विस्तार के लिए केवल उम्र को आधार न बनाया जाए, बल्कि संबंधित शिक्षक के स्वास्थ्य, शैक्षणिक योगदान, व्यावसायिक क्षमता और संस्थान की आवश्यकता का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाए।
डीएमए के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था शिक्षक, आधारभूत ढांचे और चिकित्सकीय अनुभव पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि आधारभूत ढांचे का निर्माण किया जा सकता है, लेकिन दशकों का अनुभव रखने वाला कुशल चिकित्सा शिक्षक तैयार करने में लंबा समय लगता है। डीएमए ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य बिना किसी मूल्यांकन के सभी वरिष्ठ चिकित्सकों को सेवा में बनाए रखना नहीं है। संगठन योग्यता, स्वास्थ्य, क्षमता और शैक्षणिक योगदान के आधार पर सेवा जारी रखने की व्यवस्था की मांग कर रहा है।
डीएमए की प्रमुख मांगें
* वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षकों की ऊपरी आयु सीमा समाप्त करने या पर्याप्त रूप से बढ़ाने पर विचार किया जाए।
* अंतरिम व्यवस्था के तहत योग्य वरिष्ठ शिक्षकों को 75 वर्ष तक सेवा जारी रखने का अवसर दिया जाए।
* सेवा विस्तार का आधार केवल उम्र न होकर स्वास्थ्य, योग्यता और शैक्षणिक योगदान बनाया जाए।
* वरिष्ठ शिक्षकों के अनुभव का उपयोग युवा चिकित्सकों की शिक्षा, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में किया जाए।
डीएमए ने केंद्र सरकार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने और आवश्यक नीतिगत बदलाव करने का आग्रह किया है।
