रोहतक, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएसआर), रोहतक द्वारा परीक्षा शुल्क में की गई वृद्धि का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री कुमारी आरती सिंह राव और विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन भेजकर परीक्षा शुल्क बढ़ाने संबंधी अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।

यह ज्ञापन डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास और राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी की ओर से भेजा गया है। संगठन का कहना है कि परीक्षा शुल्क में की गई वृद्धि छात्र विरोधी, अन्यायपूर्ण और आर्थिक रूप से बोझ बढ़ाने वाला निर्णय है। डॉ. अमित व्यास ने कहा कि सरकारी विश्वविद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, न कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालना।
उन्होंने कहा कि मेडिकल विद्यार्थी पहले ही ट्यूशन फीस, हॉस्टल, पुस्तकों, परिवहन और अन्य शैक्षणिक खर्चों का वहन कर रहे हैं। ऐसे में परीक्षा शुल्क में भारी बढ़ोतरी हजारों विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनेगी। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय ने परीक्षा शुल्क में इतनी बड़ी वृद्धि की है तो इसके पीछे का वित्तीय और प्रशासनिक आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि डीएमए इंडिया इस फैसले का लोकतांत्रिक तरीके से हर स्तर पर विरोध करेगी। राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि विद्यार्थियों को सीधे प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण निर्णय बिना किसी पूर्व संवाद और परामर्श के लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है और इसे आर्थिक बोझ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
डीएमए इंडिया की प्रमुख मांगें
* परीक्षा शुल्क वृद्धि संबंधी अधिसूचना तत्काल प्रभाव से वापस ली जाए।
* शुल्क वृद्धि के वित्तीय और प्रशासनिक औचित्य को सार्वजनिक किया जाए।
* भविष्य में विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले किसी भी शुल्क संशोधन से पहले डीएमए इंडिया और छात्र प्रतिनिधियों से औपचारिक विचार-विमर्श किया जाए।
* छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी, न्यायसंगत और किफायती शुल्क नीति लागू की जाए।
डीएमए इंडिया ने स्वास्थ्य मंत्री कुमारी आरती सिंह राव से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा शुल्क वृद्धि का निर्णय वापस लेने के निर्देश देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि परीक्षा शुल्क में मनमानी वृद्धि केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि समान, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिकार से भी जुड़ा विषय है। विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।