मुख्यमंत्री ने दादा लख्मीचंद जयंती पर साहित्यकारों, कवियों और कलाकारों को किया सम्मानित
रोहतक, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूर्य कवि पंडित दादा लख्मीचंद केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि हरियाणा की आत्मा, लोक संस्कृति के प्रहरी और जन-जन के शिक्षक थे। उन्होंने अपनी रागनियों और सांगों के माध्यम से सत्य, त्याग, धर्म, निष्ठा और मानवीय मूल्यों का संदेश समाज तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं ने केवल लोगों का मनोरंजन नहीं किया, बल्कि पीढ़ियों के चरित्र निर्माण के साथ हरियाणवी लोक संस्कृति को विशिष्ट पहचान दिलाई।

मुख्यमंत्री रोहतक स्थित दादा लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में दादा लख्मीचंद की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय और हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
मुख्यमंत्री ने दादा लख्मीचंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण करने के साथ विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया और विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों, कवियों एवं कलाकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि किसी समाज की पहचान केवल उसकी ऊंची इमारतों या आर्थिक प्रगति से नहीं होती, बल्कि उसकी भाषा, साहित्य, संस्कृति और कलाकार उसकी वास्तविक पहचान होते हैं। इतिहास घटनाओं को दर्ज करता है, जबकि साहित्य किसी युग की संवेदनाओं को अमर बना देता है। जिस समाज का साहित्य जीवित रहता है, उसकी संस्कृति कभी समाप्त नहीं होती। आधुनिकता को अपनाना जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सम्मानित साहित्यकारों और कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि साहित्यकार की लेखनी केवल शब्दों का सृजन नहीं करती, बल्कि समाज की चेतना को दिशा देती है। कलाकार अपनी कला के माध्यम से संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखते हैं। इसलिए साहित्यकारों और कलाकारों का सम्मान समाज की सृजनशील चेतना का सम्मान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश की भाषा, साहित्य, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य कलाकारों और साहित्यकारों को सम्मान देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना है। इसी सोच के तहत रोहतक के विश्वविद्यालय का नाम दादा लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय रखा गया है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा हिंदी में विश्वविद्यालय स्तर के विभिन्न विषयों की पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है। फारसी लिपि में उपलब्ध दुर्लभ हिंदी साहित्य को देवनागरी लिपि में प्रकाशित करने का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे ऐतिहासिक साहित्यिक धरोहर नई पीढ़ी तक पहुंच सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचकूला स्थित हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी भवन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। वहीं राखीगढ़ी स्थित सप्त सिंधु हड़प्पा ज्ञान केंद्र देश की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। सरकार ऐसी सांस्कृतिक चेतना विकसित करना चाहती है, जिससे युवा अपनी भाषा, इतिहास, परंपराओं और राष्ट्र पर गर्व कर सकें।
समारोह में मुख्यमंत्री ने पंडित लख्मीचंद के पौत्र विष्णु दत्त कौशिक को शॉल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। दादा लख्मीचंद के प्रपौत्र चेतन कौशिक और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी योगेश ने उनकी रचनाओं की प्रस्तुति दी।
