जिला प्रशासन द्वारा पांच झोलाछाप डॉक्टरों पर दर्ज कराई गई एफआईआर
गावं में स्थिति पूर्ण नियंत्रण में, जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में लगातार सक्रिय
उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने रिपोर्ट के आधार पर प्रेस वार्ता में किया गांव छांयसा में हुई मृत्यु बारे खुलासा
पलवल, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने लघु सचिवालय सभागार में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एनसीडीसी तथा पुणे और चेन्नई की विशेषज्ञ टीम द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर खुलासा किया कि जिला के गांव छांयसा में 13 मरीजों में से 8 मरीजों की मृत्यु का कारण एनर्जी ड्रिंक का सेवन और झोलाछाप डॉक्टरों से उपचार करवाना रहा।

जिला प्रशासन की ओर से एनर्जी ड्रिंक की जांच करवाने सहित पांच झोलाछाप डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है और मामले की पूरी निगरानी और मॉनिटरिंग की जा रही है। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए बचाव कार्यों से गांव छांयसा में अब स्थिति पूर्ण रूप से नियंत्रण में है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल बीमारी पर नियंत्रण पाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना भी है। उन्होंने ग्रामीणों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य शिविर या नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच करवाएं ताकि समय पर इलाज संभव हो सके और बीमारी के फैलाव को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा टीम बनाकर एनर्जी ड्रिंक व झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जांच अभियान चलाकर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा गांव में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं बारे आवश्यक कदम उठाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कैंप में हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी, ओटी तथा लिवर फंक्शन आदि टेस्ट किए जा रहे हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों से न करवाएं इलाज : उपायुक्त
उपायुक्त ने ग्रामीणों से आह्वान करते हुए स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियां अपनाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे बीमार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज न करवाएं। ऐसे डॉक्टर बिना उचित डिग्री और लाइसेंस के इलाज करते हैं, जिससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि गलत दवा या इलाज से बीमारी बढ़ सकती है और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। लोगों को चाहिए कि वे केवल पंजीकृत और योग्य डॉक्टरों से ही इलाज करवाएं।