सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और बैरिकेडिंग की गई। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से बनी थी और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्रवाई की गई।

मस्जिद को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को निर्माण को अवैध मानते हुए बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी। जिला जज की अदालत ने 2 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने शनिवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
जमीन को लेकर था मुख्य विवाद
मामले में मुख्य विवाद मस्जिद की जमीन के स्वामित्व को लेकर था। सरकारी पक्ष ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए जमीन को सरकारी संपत्ति बताया। अदालत में मस्जिद पक्ष की ओर से वक्फ संपत्ति होने और पुराने दस्तावेजों के आधार पर मस्जिद के अस्तित्व का दावा किया गया था। दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों पर सुनवाई के बाद जिला अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।
अदालत के फैसले के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक, ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे।
कार्रवाई के बाद गरमाई सियासत
मस्जिद गिराए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए धार्मिक सौहार्द और दूसरे धर्मों की आस्था के सम्मान की बात कही। उन्होंने कहा कि दूसरे धर्म की आस्था का सम्मान करना भी सनातन की भावना का हिस्सा है। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मस्जिदों को अवैध बताकर ध्वस्त करने का अभियान उचित नहीं है और सरकार को ऐसे मामलों में दूसरे समाधान तलाशने चाहिए। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए हाउस अरेस्ट किया गया। उनका कहना है कि वह अधिकारियों से बातचीत कर मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए समय चाहती थीं, लेकिन उन्हें ऐसा अवसर नहीं मिला।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी कार्रवाई का विरोध किया और इसे संविधान में मिले अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ एक इमारत को गिराने का मामला नहीं है, बल्कि इससे जुड़े संवैधानिक अधिकारों का भी सवाल है।
बीजेपी ने कहा- कानून के मुताबिक हुई कार्रवाई
वहीं बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जब जांच में निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध पाया गया और अदालत ने भी प्रशासन के आदेश को बरकरार रखा, तो कार्रवाई कानून के तहत ही हुई है। इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर जहां अदालत के फैसले का हवाला दिया जा रहा है, वहीं विपक्ष कार्रवाई के तरीके और धार्मिक सौहार्द को लेकर सवाल उठा रहा है।
