दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी फाउंडेशन को सूचना के अधिकार कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी’ घोषित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया. जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ता शन्मुगा पात्रो पिछली कई तारीखों से सुनवाई में पेश नहीं हो रहे थे.
वकील शन्मुगा पात्रो ने साल 2011 में हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग के साल 2010 के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी मानने से इनकार कर दिया गया था. याचिका में दलील दी गई थी कि फाउंडेशन की गतिविधियों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है.इसलिए उसे आरटीआई कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए.
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सरकारी सुविधाओं का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को सरकार की ओर से कई तरह की सुविधाएं और रियायतें मिली हैं. इनमें नई दिल्ली के राजेंद्र प्रसाद रोड पर करीब 9,319.42 वर्ग गज जमीन और उस पर बनी इमारत भी शामिल है.याचिका में आरोप लगाया गया था कि इसके लिए लाइसेंस फीस या संपत्ति कर का भुगतान नहीं किया गया.
1991 में हुई थी राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना
याचिका के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निधन के बाद साल 1991 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने लोगों से उन उद्देश्यों के लिए योगदान देने की अपील की थी, जिनसे राजीव गांधी जुड़े रहे थे. इसके बाद 1991-92 के केंद्रीय बजट में राजीव गांधी फाउंडेशन के गठन की घोषणा की गई याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष और राष्ट्रीय रक्षा कोष का उदाहरण देते हुए कहा था कि इन दोनों को सरकारी अनुदान नहीं मिलने के बावजूद आरटीआई कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी माना गया है.इसी आधार पर RGF को भी आरटीआई के दायरे में लाने की मांग की गई थी.
CIC के फैसले को दी थी चुनौती
याचिकाकर्ता ने आरटीआई कानून की धारा 18 के तहत CIC का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने फाउंडेशन की गतिविधियों की जांच की मांग की थी. हालांकि, CIC ने उनकी शिकायत खारिज कर दी थी.इसके बाद हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि CIC ने मामले की सुनवाई जल्दबाजी में की और फाउंडेशन की ओर से पेश की गई जरूरी सामग्री भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई.
कोर्ट में लगातार गैरहाजिरी पड़ी भारी
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की लगातार गैरहाजिरी भी सामने आई. कोर्ट ने नोट किया कि वह पिछली कई सुनवाइयों में पेश नहीं हुए. इसके बाद हाईकोर्ट ने राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी.
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