फरीदाबाद (सरूप सिंह)। जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग बच्चे को अपहरण कर 15 किलोमीटर दूर ले जाकर छह साल तक बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया। इस दौरान बच्चे के परिवार की जिंदगी पूरी तरह बिखर गई—इकलौते बेटे के गम में मां मानसिक संतुलन खो बैठी, जबकि पिता घर छोड़कर चला गया।

करीब 13 वर्षीय यह बच्चा हाल ही में एक साहसी पड़ोसी की मदद से मुक्त होकर अपने घर पहुंच सका। हालांकि, मामले में अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस पुलिस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार, एनआईटी स्थित नेहरू कॉलोनी निवासी इस बच्चे का करीब छह साल पहले दो बाइक सवार बदमाशों ने मुंह ढककर अपहरण कर लिया था। परिवार ने बच्चे की काफी तलाश की, लेकिन आरोप है कि आधार कार्ड न होने के कारण पुलिस ने शिकायत तक दर्ज नहीं की।
बंधक बनाकर कराया जाता था काम
अपहरण के बाद बच्चे को गांव ढैकोला में एक पशुपालक के यहां रखा गया, जहां उससे पशुओं की देखभाल, खेतों में काम और साफ-सफाई कराई जाती थी। जरा सी गलती पर बेरहमी से पिटाई होती थी और दिन में सिर्फ दो वक्त की रोटी दी जाती थी। बच्चे को कई बार जलाकर भी प्रताड़ित किया गया। गांव के लोगों को यह कहकर गुमराह किया गया कि उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है।
पड़ोसी की सतर्कता से खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में गांव में रहने आए एक पड़ोसी ने बच्चे को पिटते देखा और संदेह होने पर जांच की। सच्चाई सामने आने के बाद उन्होंने 25 मार्च को सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद 6 अप्रैल को बाल कल्याण परिषद में शिकायत दी गई, जहां से महज तीन घंटे के भीतर बच्चे को मुक्त करा लिया गया।