सिविल जज बनने का बदला नियम, 3 साल की जगह अब 1 साल वकालत जरूरी


सुप्रीम कोर्ट ने आज यह फैसला 2-1 के बहुमत से सुनाया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस ऑगस्ट जॉर्ज मसीह ने बहुमत पर फैसला दिया, जबकि जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने इससे असहमति जताई.

सुप्रीम कोर्ट ने आज यह फैसला 2-1 के बहुमत से सुनाया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस ऑगस्ट जॉर्ज मसीह ने बहुमत पर फैसला दिया, जबकि जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने इससे असहमति जताई.

सुप्रीम कोर्ट के नए नियमों के अनुसार 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होने वाले ज्यूडिशियल सर्विस भर्ती नोटिफिकेशन के तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार के पास कम से कम 1 साल की एक्टिव लीगल प्रैक्टिस होनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के नए नियमों के अनुसार 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होने वाले ज्यूडिशियल सर्विस भर्ती नोटिफिकेशन के तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार के पास कम से कम 1 साल की एक्टिव लीगल प्रैक्टिस होनी चाहिए.

इस प्रैक्टिस को तय प्रक्रिया के तहत प्रमाणित भी करना होगा. इसके लिए उम्मीदवार की कोर्ट की कार्यवाही में मौजूदगी और प्रभावी भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड को देखा जाएगा. यानी लॉ की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद सिविल जज की परीक्षा देने की व्यवस्था अब नहीं होगी. लेकिन पहले लागू 3 साल की अनिवार्य वकालत की अवधि को कम कर दिया गया है.

इस प्रैक्टिस को तय प्रक्रिया के तहत प्रमाणित भी करना होगा. इसके लिए उम्मीदवार की कोर्ट की कार्यवाही में मौजूदगी और प्रभावी भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड को देखा जाएगा. यानी लॉ की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद सिविल जज की परीक्षा देने की व्यवस्था अब नहीं होगी. लेकिन पहले लागू 3 साल की अनिवार्य वकालत की अवधि को कम कर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि परीक्षा पास करने लेने के बाद उम्मीदवारों की नियमित न्यायिक अधिकारी के तौर पर तुरंत नियुक्ति नहीं होगी. चयनित उम्मीदवारों को पहले एक साल की जुडिशियल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी. इसके बाद उन्हें 1 साल की स्ट्रक्चर्ड लॉ क्लर्कशिप करनी होगी. इस तरह चयन के बाद भी उम्मीदवार को कोर्ट की कार्य प्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया का व्यावहारिक एक्सपीरियंस दिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि परीक्षा पास करने लेने के बाद उम्मीदवारों की नियमित न्यायिक अधिकारी के तौर पर तुरंत नियुक्ति नहीं होगी. चयनित उम्मीदवारों को पहले एक साल की जुडिशियल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी. इसके बाद उन्हें 1 साल की स्ट्रक्चर्ड लॉ क्लर्कशिप करनी होगी. इस तरह चयन के बाद भी उम्मीदवार को कोर्ट की कार्य प्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया का व्यावहारिक एक्सपीरियंस दिया जाएगा.

ज्यूडिशियल ट्रेनिंग राज्य के संबंधित ज्यूडिशल एकेडमी में होगी. इसके बाद क्लर्कशिप के दौरान उम्मीदवारों को वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों और हाईकोर्ट के जजों की निगरानी में काम करने का मौका मिलेगा.

ज्यूडिशियल ट्रेनिंग राज्य के संबंधित ज्यूडिशल एकेडमी में होगी. इसके बाद क्लर्कशिप के दौरान उम्मीदवारों को वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों और हाईकोर्ट के जजों की निगरानी में काम करने का मौका मिलेगा.

चयनित उम्मीदवारों की 1 साल की लॉ क्लर्कशिप को दो हिस्सों में बांटा गया है. पिछले 6 महीने वे प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज या हायर ज्यूडिशियल सर्विस के सदस्यों के अधीन लॉ क्लर्क के तौर पर काम करेंगे. इसके बाद अगले 6 महीने संबंधित हाई कोर्ट के मौजूदा जजों की निगरानी में क्लर्कशिप करेंगे. क्लर्कशिप पूरी होने के बाद संबंधित हाई कोर्ट के सुपरवाइजिंग जज उम्मीदवार की प्रगति और उपयुक्तता को लेकर मूल्यांकन रिपोर्ट देंगे.

चयनित उम्मीदवारों की 1 साल की लॉ क्लर्कशिप को दो हिस्सों में बांटा गया है. पिछले 6 महीने वे प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज या हायर ज्यूडिशियल सर्विस के सदस्यों के अधीन लॉ क्लर्क के तौर पर काम करेंगे. इसके बाद अगले 6 महीने संबंधित हाई कोर्ट के मौजूदा जजों की निगरानी में क्लर्कशिप करेंगे. क्लर्कशिप पूरी होने के बाद संबंधित हाई कोर्ट के सुपरवाइजिंग जज उम्मीदवार की प्रगति और उपयुक्तता को लेकर मूल्यांकन रिपोर्ट देंगे.

वहीं संतोषजनक मूल्यांकन के बाद उम्मीदवार को नियमित न्यायिक पद पर नियुक्ति और उससे जुड़े वेतन व सेवा भत्ते मिलेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने उन लॉ ग्रेजुएट्स के लिए भी राहत दी है, जो पुराने और नए नियमों के बीच फंस गए थे. 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाले ज्यूडिशियल परीक्षा नोटिफिकेशन के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को 3 साल की प्रैक्टिस पूरी करने की जरूरत नहीं होगी.

वहीं संतोषजनक मूल्यांकन के बाद उम्मीदवार को नियमित न्यायिक पद पर नियुक्ति और उससे जुड़े वेतन व सेवा भत्ते मिलेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने उन लॉ ग्रेजुएट्स के लिए भी राहत दी है, जो पुराने और नए नियमों के बीच फंस गए थे. 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाले ज्यूडिशियल परीक्षा नोटिफिकेशन के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को 3 साल की प्रैक्टिस पूरी करने की जरूरत नहीं होगी.

इन उम्मीदवारों को आवेदन के लिए 1 साल की प्रैक्टिस पूरी मान लिया जाएगा और इस अवधि के लिए उन्हें अलग से प्रैक्टिस सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं होगी. इस दौरान चयनित उम्मीदवारों को भी 1 साल की ज्यूडिशियल एकेडमी ट्रेनिंग और उसके बाद 1 साल की सुपरवाइज्ड क्लर्कशिप से गुजरना होगा.

इन उम्मीदवारों को आवेदन के लिए 1 साल की प्रैक्टिस पूरी मान लिया जाएगा और इस अवधि के लिए उन्हें अलग से प्रैक्टिस सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं होगी. इस दौरान चयनित उम्मीदवारों को भी 1 साल की ज्यूडिशियल एकेडमी ट्रेनिंग और उसके बाद 1 साल की सुपरवाइज्ड क्लर्कशिप से गुजरना होगा.

आपको बता दें कि सिविल जज की भर्ती में वकालत के एक्सपीरियंस को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख पहले भी बदल चुका है. 2002 में कोर्ट ने 3 साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता खत्म कर दी थी. इसके बाद लॉ ग्रेजुएट्स बिना वकालत का अनुभव लिए न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल हो सकते थे. हालांकि 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त फिर से लागू कर दी थी. कोर्ट का मानना था कि न्यायिक पद संभालने से पहले उम्मीदवारों को कोर्ट की वास्तविक कार्य प्रणाली का अनुभव होना चाहिए.

आपको बता दें कि सिविल जज की भर्ती में वकालत के एक्सपीरियंस को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख पहले भी बदल चुका है. 2002 में कोर्ट ने 3 साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता खत्म कर दी थी. इसके बाद लॉ ग्रेजुएट्स बिना वकालत का अनुभव लिए न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल हो सकते थे. हालांकि 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त फिर से लागू कर दी थी. कोर्ट का मानना था कि न्यायिक पद संभालने से पहले उम्मीदवारों को कोर्ट की वास्तविक कार्य प्रणाली का अनुभव होना चाहिए.

वहीं इस फैसले के बाद कई लॉ ग्रेजुएट्स और दूसरे पक्षों ने समीक्षा याचिका दाखिल की. उनका कहना था कि लंबे समय की प्रैक्टिस की शर्त से उन युवाओं के लिए परेशानी बढ़ेगी, जिसमें उन्होंने पहले से लागू व्यवस्था के आधार पर अपने करियर की योजना बनाई थी.

वहीं इस फैसले के बाद कई लॉ ग्रेजुएट्स और दूसरे पक्षों ने समीक्षा याचिका दाखिल की. उनका कहना था कि लंबे समय की प्रैक्टिस की शर्त से उन युवाओं के लिए परेशानी बढ़ेगी, जिसमें उन्होंने पहले से लागू व्यवस्था के आधार पर अपने करियर की योजना बनाई थी.

Published at : 21 Aug 2026 07:56 PM (IST)

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Prime Haryana
Author: Prime Haryana

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