प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने इसकी सप्लाई बढ़ाने के लिए कदम तेज कर दिए हैं. सरकार का कहना है कि देश में प्याज की उपलब्धता फिलहाल पर्याप्त है और आने वाले महीनों में भी सप्लाई की कमी नहीं होने दी जाएगी. सरकार के मुताबिक 2025-26 में करीब 307.37 लाख टन प्याज पैदा होने का अनुमान है. इसके अलावा सरकार के पास प्याज का बफर स्टॉक भी मौजूद है जिसे जरूरत के हिसाब से बाजार में उतारा जा रहा है.
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ती हैं कीमतें?
सरकार के मुताबिक हर साल अगस्त-सितंबर के आसपास प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. इसके पीछे त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग, मौसम, मंडियों में आवक और सप्लाई चेन जैसी वजहें होती हैं. कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार बफर स्टॉक से प्याज निकालकर मंडियों और बड़े शहरों में बेचती है
अब ‘कांदा एक्सप्रेस’ से पहुंचेगा प्याज
प्याज को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए सरकार ‘कांदा एक्सप्रेस’ चला रही है. इसमें रेलवे के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज को देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जा रहा है. 2024-25 में 14 रेलवे रैक के जरिए करीब 12 हजार टन प्याज 5 शहरों तक पहुंचाया गया था. 2025-26 में इसे बढ़ाकर 86 रैक और करीब 88 हजार टन प्याज किया गया. अब 24 अगस्त 2026 से नासिक से प्याज की सप्लाई शुरू की जा रही है.
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शुरुआत में प्याज दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे 5 बड़े शहरों में भेजा जाएगा. जरूरत के हिसाब से बाद में दूसरे शहरों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. सरकार का कहना है कि वह प्याज की कीमत, मंडियों में आवक और उपलब्धता पर लगातार नजर रख रही है. जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक से और प्याज बाजार में उतारा जाएगा.
सरकार का कहना है कि उसकी कोशिश है कि उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के हितों के बीच संतुलन बना रहे. एक ओर उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमतों से बचाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
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