दिल्ली पुलिस स्पेशल स्टाफ टीम ने नशे के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने नेपाल से दिल्ली तक चल रहे चरस के नेटवर्क से जुड़े चार नेपाली नागरिकों को गिरफ्तार किया है.इनके कब्जे और ठिकाने से कुल 106.250 किलो हाई क्वालिटी चरस बरामद हुई है पुलिस ने इसकी कीमत करीब 109 करोड़ रुपये बताई है.इतनी बड़ी मात्रा में चरस बरामद होने से साफ है कि आरोपी छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर नशे की सप्लाई कर रहे थे.
पूरी कहानी 29 जून को शुरू हुई. स्पेशल स्टाफ को सूचना मिली थी कि नेपाल के कुछ लोग दिल्ली-एनसीआर में चरस की सप्लाई कर रहे हैं. टीम ने इनकी गतिविधियों पर नजर रखी और कोटला मुबारकपुर में एक मकान पर छापा मारा. यहां भारत थापा, गोविंद बुधा और ज्योति पुन मगर को पकड़ा गया. इनके पास से 8.598 किलो चरस मिली.इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के साथ उनके मोबाइल, संपर्कों और पैसों के लेनदेन की पड़ताल शुरू की. मकसद सिर्फ इन तीन आरोपियों को पकड़ना नहीं बल्कि यह पता लगाना था कि इनके पीछे माल कौन पहुंचा रहा है और दिल्ली में इसकी बड़ी खेप कहां रखी जाती है.
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पूछताछ में खुला वजीराबाद के गोदाम का राज
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को रोशनी मगर के बारे में जानकारी मिली.पुलिस के मुताबिक रोशनी दिल्ली के वजीराबाद में चरस के बड़े स्टोरेज और सप्लाई प्वाइंट को संभाल रही थी.टीम ने लगातार निगरानी कर उसके ठिकाने की पहचान की.12 अगस्त को पुलिस ने यहां छापा मारा तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए.मकान से 97.652 किलो चरस बरामद हुई.यह चरस 13 प्लास्टिक बैग में भरी हुई थी.मौके से चरस मिलाने की मशीन और पैकिंग का सामान भी मिला.पुलिस ने रोशनी मगर को गिरफ्तार कर लिया.
एक के बाद एक खुलती गई कड़ियां
रोशनी ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि वह भारत थापा, गोविंद बुधा और ज्योति पुन मगर के नेटवर्क से जुड़ी थी.तीनों की गिरफ्तारी के बाद वह नेपाल चली गई थी. कुछ समय बाद उसे लगा कि मामला शांत हो गया है इसलिए वह दोबारा भारत आई और फिर से नेटवर्क के लिए काम शुरू कर दिया .इस तरह 29 जून को बरामद हुई 8.598 किलो चरस की कड़ी आखिरकार 12 अगस्त को मिली 97.652 किलो की बड़ी खेप तक पहुंच गई. दोनों कार्रवाई में कुल 106.250 किलो चरस बरामद हुई.
नेपाल से सड़क के रास्ते आती थी चरस
पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह नेपाल में मौजूद सप्लाई नेटवर्क से चरस हासिल करता था.इसके बाद इसे सोनाौली बॉर्डर के आसपास के रास्ते सड़क मार्ग से दिल्ली लाया जाता था. पुलिस के मुताबिक सड़क के रास्ते माल लाने की रणनीति इसलिए अपनाई जाती थी ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके.दिल्ली पहुंचने के बाद चरस को अलग-अलग ठिकानों पर रखा जाता था और फिर जरूरत के हिसाब से आगे सप्लाई किया जाता था.
सोशल मीडिया पर ऑर्डर, ऑटो और बाइक टैक्सी से डिलीवरी
गिरोह ने नशे की सप्लाई के लिए अपना पूरा सिस्टम बना रखा था.पुलिस के मुताबिक ग्राहक सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करते थे. ऑर्डर मिलने के बाद भुगतान नकद या ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए लिया जाता था.इसके बाद चरस की डिलीवरी के लिए ऑटो और बाइक टैक्सी का इस्तेमाल किया जाता था. पुलिस के अनुसार आरोपी लेनदेन पूरा होने के बाद मोबाइल से चैट और दूसरी डिजिटल जानकारी भी डिलीट कर देते थे.ताकि सबूत न बचे.
युवाओं वाले इलाकों पर खास नजर
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ऐसे इलाकों को निशाना बना रहा था जहां युवाओं की आवाजाही ज्यादा है. पुलिस के मुताबिक वजीराबाद और मजनू का टीला इसके प्रमुख डिमांड सेंटर थे.आसपास के पब, बार और होटलों में आने वाले ग्राहकों और स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटरों तक चरस पहुंचाने की बात सामने आई है.
नेपाल के दो और सप्लायर पुलिस के निशाने पर
जांच अभी खत्म नहीं हुई है.पुलिस को बिनमाया नाम के नेपाली नागरिक की तलाश है जिसे कथित तौर पर नेपाल से दिल्ली तक चरस पहुंचाने की व्यवस्था करने वाला अहम कड़ी माना जा रहा है.इसके अलावा हरि नाम के एक अन्य नेपाली नागरिक का नाम भी सामने आया है.अब पुलिस इनके ठिकाने, बैंक लेनदेन और नेपाल से दिल्ली तक जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है.
चारों का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार चारों आरोपियों का अब तक कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है. बावजूद इसके, जांच में इनके बड़े पैमाने पर ड्रग सप्लाई नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और दिल्ली-एनसीआर में चरस की कितनी खेप पहले पहुंचाई जा चुकी है.
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