केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वह महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे और सिलीगुड़ी में सीमा सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे. अधिकारियों ने बुधवार (19 अगस्त) को यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री गुरुवार को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे और शाम को वहां स्थित शोर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे.
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना के अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप शामिल हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष हैं. इस बैठक में दक्षिणी क्षेत्र के सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और प्रशासक और हर राज्य के दो सीनियर मंत्री शामिल होंगे.
तमिलनाडु कर रहा मेजबानी
सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, ‘राज्य सरकारों के मुख्य सचिव/सलाहकार और अन्य सीनियर अफसर और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में हिस्सा लेंगे.’ बयान में कहा गया कि सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री बारी-बारी से परिषद के उपाध्यक्ष बनते हैं. दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक का आयोजन भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा तमिलनाडु सरकार की मेजबानी में किया जा रहा है.
इस व्यवस्था के तहत क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का भी गठन किया है.’राज्यों के प्रस्तावित मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के समक्ष चर्चा के लिए रखा जाता है और वहां विचार-विमर्श के बाद शेष मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया जाता है.’
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बंगाल भी जाएंगे शाह
इसके बाद अमित शाह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जाएंगे, जहां शुक्रवार को वह सीमा सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और सशस्त्र सीमा बल के जवानों से बातचीत करेंगे. अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्री शुक्रवार शाम तीन नए आपराधिक कानूनों पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे. इसके अलावा वह शनिवार को शहर में सीमा सुरक्षा से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करेंगे. राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद समेत पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई थी.
ये परिषद दो या दो से ज्यादा राज्यों या केंद्र और राज्यों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और चर्चा के लिए एक व्यवस्थित सिस्टम उपलब्ध कराती हैं और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान करती हैं. सलाहकारी भूमिका वाली ये परिषद पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों के बीच आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं.
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