आप नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में आबकारी नीति मामले में CBI की रिवीजन याचिका खारिज करने की मांग की है. इसके लिए उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल की है. केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने आबकारी नीति मामले में आरोप मुक्त होने के फैसले के खिलाफ CBI की याचिका पर सवाल उठाए हैं.
दोनों नेताओं का दावा है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के महज चार घंटे के भीतर रिवीजन याचिका दाखिल हुई. आरोप है कि याचिका दाखिल करने में CBI ने जल्दबाजी दिखाई है. इस बीच अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने CBI की रिवीजन याचिका की मेंटेनबिलिटी पर भी सवाल उठाए हैं.
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‘बेहद गैर-गंभीर तरीके से दाखिल की है याचिका’
दोनों नेताओं ने अपनी याचिका में कहा, “CBI ने याचिका बेहद गैर-गंभीर तरीके से दाखिल की है. कोर्ट में सिसोदिया और केजरीवाल ने कहा है रिवीजन याचिका में निचली अदालत के फैसले में किसी विशिष्ट अवैधता की ओर इशारा नहीं किया गया है. इसके बावजूद जल्दबाजी में सीबीआई ने रिवीजन पीटिशन दाखिल की है. बता दें कि आबकारी नीति मामले में ट्रायल कोर्ट ने दोनों नेताओं को डिस्चार्ज किया था.
कोर्ट ने फरवरी में 22 लोगों को किया था बरी
कोर्ट ने 27 फरवरी 2026 को अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया समेत 22 अन्य आरोपियों को आबकारी मामले में बरी कर दिया था. जिसके बाद सीबीआई ने इस आदेश को चुनौती दी और यह मामला फिर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के पास आया. वहीं 9 मार्च को स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब नीति घोटाले में जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश पर रोक लगा दी थी.
इसके अलवा अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने बाद में स्वर्ण कांता शर्मा को इस मामले से अलग करने के लिए आवेदन किया था. इसके बाद दोनों नेताओं ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष होने वाली सुनवाई का बहिष्कार करने का फैसला लिया.
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