अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी, विपक्ष ने उठाए सवाल

नई दिल्ली, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।

https://x.com/SecScottBessent/status/2029714253725262232?s=20

उन्होंने कहा कि अमेरिकी ट्रेज़री विभाग भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दे रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति में बाधा न आए। हालांकि यह छूट सीमित अवधि के लिए है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। इससे पहले अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था, जिससे कुल अमेरिकी टैरिफ लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।

फरवरी 2026 में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत ने रूसी तेल आयात कम करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद भारत पर लगाया गया टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। साथ ही चेतावनी भी दी गई थी कि अगर भारत ने रूसी तेल आयात कम नहीं किया तो टैरिफ फिर बढ़ाया जा सकता है। भारत सरकार ने उस समय साफ कहा था कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और 1.4 अरब लोगों की जरूरतें सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

ईरान संकट से बढ़ी चिंता

अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। भारत के लिए इसका महत्व और अधिक है क्योंकि देश की करीब 40 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

भारत की ऊर्जा निर्भरता

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें बड़ी मात्रा इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से आती है, जो होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते भारत तक पहुंचती है। विश्लेषकों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है तो भारत में महंगाई दर लगभग 0.2 से 0.25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

भारत के पास कितना तेल भंडार

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के पास रिफाइनरियों और स्टोरेज सुविधाओं में करीब 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल मौजूद है, जिससे लगभग 30 से 35 दिनों तक की जरूरत पूरी हो सकती है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संसद में बता चुके हैं कि रणनीतिक भंडार और अन्य स्टोरेज मिलाकर भारत के पास लगभग 74 दिनों तक की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की क्षमता है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

अमेरिका के इस फैसले के बाद भारत में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “भारत लोकतंत्र की जननी है, लेकिन अमेरिका हमें 30 दिन के लिए तेल खरीदने की अनुमति दे रहा है। यही हमारा आत्मनिर्भर भारत और स्वतंत्र विदेश नीति है।” वहीं कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की स्थिति स्पष्ट करने का जवाब भारत की बजाय अमेरिका की ओर से आना देश के लिए चिंताजनक है।

गैस सप्लाई पर भी असर संभव

इसी बीच प्राकृतिक गैस के बड़े आपूर्तिकर्ता कतर ने भी एक ईरानी ड्रोन हमले के बाद उत्पादन रोकने की संभावना जताई है। भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत कतर से आयात करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।

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Author: Prime Haryana

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