बिना बुनियादी सुविधाओं के प्लॉट सौंपने पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पर गिरी गाज, राइट टू सर्विस कमीशन ने लगाया जुर्माना

फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। नहरपार फरीदाबाद में सेक्टरों के विकास को लेकर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना ही लोगों को प्लॉट का कब्जा देने के मामले में हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने सख्त रुख अपनाते हुए प्राधिकरण पर जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई सेक्टर 76-77 में प्लॉट लेने वाले केशव शर्मा की शिकायत पर की गई। शिकायत में बताया गया कि इलाके में सड़क, बिजली, पेयजल और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित किए बिना ही प्लॉट का पजेशन ऑफर कर दिया गया।

15 दिन में देना होगा मुआवजा

मामले की सुनवाई के बाद राइट टू सर्विस कमीशन ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि यह राशि 15 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में दी जाए और इसकी जानकारी 24 मार्च तक आयोग को उपलब्ध कराई जाए।

बिना विकास कार्य के कर दी प्लॉटिंग

जानकारी के अनुसार ग्रेटर फरीदाबाद के कई सेक्टरों में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने ई-ऑक्शन के माध्यम से प्लॉट बेचे और लोगों से लाखों रुपये वसूले, लेकिन मौके पर अभी तक आवश्यक विकास कार्य पूरे नहीं किए गए। इसके बावजूद प्लॉट धारकों को पजेशन ऑफर कर दिया गया, जिससे लोग घर बनाने को लेकर असमंजस में हैं।

कमीशन ने जताई कड़ी आपत्ति

राइट टू सर्विस कमीशन के चेयरमैन टी.सी. गुप्ता ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा कि किसी भी सेक्टर में प्लॉट की नीलामी से पहले वहां आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधूरी सुविधाओं के बावजूद प्लॉट का ई-ऑक्शन करना नियमों के विपरीत है। कमीशन ने यह भी स्पष्ट किया कि अलॉटमेंट लेटर के अनुसार यदि आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर पजेशन नहीं दिया जाता, तो संबंधित प्राधिकरण को अलॉटी को ब्याज देना होता है। आयोग के हस्तक्षेप के बाद ही ऐसे मामलों में ब्याज देना शुरू किया गया।

अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

सुनवाई के दौरान आयोग ने यह भी कहा कि उस समय के एस्टेट ऑफिसर और HSVP के ई-ऑक्शन सेल की भूमिका की जांच होनी चाहिए, क्योंकि विकास कार्यों की स्थिति स्पष्ट किए बिना ही प्लॉटों को नीलामी के लिए मंजूरी दे दी गई थी। गौरतलब है कि 12 अगस्त 2022 को HSVP के तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर ने संबंधित अधिकारियों को दो महीने के भीतर विकास कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

हाईकोर्ट भी जता चुका है नाराजगी

इससे पहले एक अन्य मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि HSVP का उद्देश्य नो-प्रॉफिट, नो-लॉस के आधार पर सस्ती आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन कई मामलों में इसकी कार्यप्रणाली मुनाफे पर आधारित दिखाई देती है, जो मध्यम और निम्न आय वर्ग के हितों के खिलाफ है। कमीशन ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी ऐसी लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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Author: Prime Haryana

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