Success Story : कन्नूर कोर्ट की पहली दृष्टिहीन जज, ऐसे सुनती हैं केस


Success Story : केरल के कन्नूर जिले की रहने वाली थान्या नाथन सी. की सफलता की कहानी बेहद खास है. जन्म से दृष्टिबाधित होने के बाद भी थान्या ने कानून की पढ़ाई पूरी की और वकालत भी की. अब उन्होंने सिविल जज परीक्षा की दिव्यांग श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया है और न्यायिक सेवा में शामिल होने जा रही हैं. वह केरल की पहली दृष्टिबाधित महिला जज बनने वाली हैं. उन्होंने पढ़ाई और वकालत के दौरान ब्रेल, स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर और ऑडियो नोट्स जैसी तकनीकों की मदद से अपनी पढ़ाई और कानूनी काम को आगे बढ़ाया.  ऐसे में आइए जानते हैं कि कन्नूर कोर्ट की पहली दृष्टिहीन जज केस कैसे सुनती हैं. 

कन्नूर कोर्ट की पहली दृष्टिहीन जज

थान्या नाथन कन्नूर के तालिपरम्बा में वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर चुकी हैं. अब सिविल जज परीक्षा में दिव्यांग कैटेगरी में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद वह न्यायिक सेवा का हिस्सा बनने जा रही हैं. जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई सामान्य तरीके से आगे बढ़ाई. शुरुआती शिक्षा स्पेशल स्कूल से लेने के बाद उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई सामान्य स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई करने का फैसला किया और कन्नूर यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया. यूनिवर्सिटी में वह टॉप भी कर चुकी हैं और अपने कॉलेज की एकमात्र दृष्टिबाधित छात्रा थीं.

कैसे काम करती हैं कन्नूर कोर्ट की पहली दृष्टिहीन जज?

जन्म से दृष्टिबाधित होने के बाद भी थान्या नाथन अपने न्यायिक काम के लिए मॉडर्न तकनीक का सहारा लेती हैं. वह स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर और डिक्टेशन सॉफ्टवेयर जैसे सहायक डिवाइसों की मदद से कानूनी डॉक्यूमेंट्स और जरूरी जानकारी को समझती हैं. वकील के तौर पर काम करते समय भी वह ई-डॉक्यूमेंट्स आसानी से संभालती थीं और केस से जुड़े नोट्स ब्रेल में तैयार करती थीं. थान्या का कहना है कि तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि स्क्रीन रीडर और डिक्टेशन जैसे डिवाइसों की मदद से न्यायिक काम का बड़ा हिस्सा संभाला जा सकता है. 

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कन्नूर कोर्ट की पहली दृष्टिहीन जज केस कैसे सुनती हैं?

दृष्टिबाधिता के बाद भी थान्या के लिए कानून की पढ़ाई और केस की तैयारी में तकनीक बड़ी मददगार रही. वह स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर, ब्रेल और ऑडियो नोट्स की सहायता से कानूनी सामग्री पढ़ती और तैयारियां करती थीं. उनके वकील के.जी. सुनीलकुमार के मुताबिक, थान्या ई-डॉक्यूमेंट्स को आसानी से संभालती हैं और कई बार कोर्ट में पेश भी हो चुकी हैं. कोर्ट की कार्यवाही को समझने और उससे जुड़े के डॉक्यूमेंट्स साथ काम करने में सहायक तकनीक उनकी जरूरी मदद करती है.

कैसे सुनाती हैं फैसले?

थान्या नाथन फैसले सुनाने और न्यायिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए सहायक तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं. वह स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर और डिक्टेशन टूल की मदद से कानूनी डॉक्यूमेंट्स, मामलों से जुड़ी जानकारी और जरूरी सामग्री को समझ सकती हैं. थान्या कानून की धाराओं को याद रखने में भी तेज हैं. थान्या ने न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी भी खुद की थी और ब्रेल लिपि में नोट्स तैयार किए थे. इंटरव्यू के दौरान उनसे यह भी पूछा गया कि वह अपनी दृष्टिबाधिता के साथ न्यायिक काम कैसे करेंगी. उन्होंने अपने काम करने का तरीका बताया और माना कि तकनीक की मदद से न्यायिक जिम्मेदारियों को निभाया जा सकता है.

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Author: Prime Haryana

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