भारतीय क्रिकेट के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. श्रीनाथ हाल ही में बेंगलुरु की नम्मा मेट्रो में सफर करते नजर आए. खास बात यह रही कि उनके हाथ में ट्रॉली बैग था और वह मेट्रो के अंदर खड़े होकर सफर कर रहे थे. उनकी तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं.
मेट्रो में खड़े दिखे जवागल श्रीनाथ
तस्वीर में जवागल श्रीनाथ मेट्रो के एक कोने में खड़े नजर आ रहे हैं. उनके पास एक ट्रॉली बैग भी रखा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें मेट्रो में बैठने के लिए सीट नहीं मिली. श्रीनाथ को इस तरह आम यात्रियों के बीच सफर करते देखकर कई लोग उनकी सादगी की तारीफ कर रहे हैं. वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या किसी यात्री ने उन्हें पहचानने के बाद भी अपनी सीट ऑफर नहीं की. एक यूजर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर मेट्रो में मौजूद लोगों ने श्रीनाथ को पहचान लिया था, तो किसी को उन्हें सीट देनी चाहिए थी. इस पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी.
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फैंस ने की सादगी की तारीफ
हालांकि, इस तस्वीर को लेकर हर प्रतिक्रिया नाराजगी वाली नहीं थी. कई क्रिकेट फैंस ने श्रीनाथ के साधारण तरीके से सफर करने की तारीफ की. लोगों को यह बात पसंद आई कि भारतीय क्रिकेट के इतने बड़े नाम होने के बावजूद वह आम लोगों की तरह पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करते नजर आए. सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर ने एक बार फिर दिखाया कि क्रिकेट से जुड़ी बड़ी हस्तियों की आम जिंदगी भी लोगों की दिलचस्पी का विषय बन जाती है.
भारत के दिग्गज तेज गेंदबाज रहे हैं श्रीनाथ
जवागल श्रीनाथ भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं. उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई की थी. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी श्रीनाथ खेल से जुड़े रहे. वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मैच रेफरी की भूमिका भी निभा चुके हैं. श्रीनाथ की मेट्रो वाली तस्वीर सामने आने के बाद उनके क्रिकेट करियर से ज्यादा उनकी सादगी चर्चा में है. किसी के लिए यह सीट न मिलने की बात है, तो किसी के लिए यह एक बड़े क्रिकेटर का आम लोगों की तरह सफर करना है. फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को लेकर यही चर्चा है कि आखिर इतने बड़े क्रिकेटर को पहचानने के बाद भी किसी ने उन्हें सीट ऑफर क्यों नहीं की. हालांकि, तस्वीर से यह तय नहीं किया जा सकता कि मेट्रो में मौजूद यात्रियों ने उन्हें पहचाना था या नहीं.
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