फरीदाबाद, (सरिप सिंह)। जिला उपायुक्त आयुष सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशानुसार हरियाणा राज्य में सार्वजनिक स्थलों पर ठोस कचरा फेंकना अब अपराध माना जाएगा। सड़कों, नालों, तालाबों, नदियों, पंचायत भूमि, राजस्व भूमि, पीडब्ल्यूडी और अन्य सरकारी जमीनों पर कचरा डालने पर सख्त प्रतिबंध लागू किया गया है।

एनजीटी के 26 जुलाई 2024 के आदेश के तहत पहली बार साधारण ठोस कचरा फेंकने पर ₹5,000 जुर्माना और पुनः उल्लंघन पर ₹10,000 वसूला जाएगा। वहीं थोक कचरा फेंकने पर पहली बार ₹25,000 तथा दोबारा अपराध करने पर ₹50,000 तक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति देनी होगी। यह राशि संबंधित व्यक्ति, संस्था, ठेकेदार या नगर निकाय से वसूली जाएगी। जुर्माना न देने की स्थिति में इसे भूमि राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूला जाएगा।
वसूली की गई राशि का उपयोग ठोस कचरा प्रबंधन, प्रसंस्करण और निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत करने में किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम आयुक्त, नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी द्वारा नामित अधिकारी और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को अधिकृत किया गया है। डीसी ने बताया कि एनजीटी ने जिला प्रशासन को कचरा प्रसंस्करण हेतु भूमि चिन्हित करने, नगर निकायों के कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा करने और किसी भी लापरवाही पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने आमजन से अपील की कि वे खुले में कचरा न फेंकें, गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखें तथा निर्धारित डस्टबिन और संग्रह वाहनों का ही उपयोग करें। उपायुक्त ने कहा कि “स्वच्छ फरीदाबाद, स्वस्थ फरीदाबाद हम सभी की जिम्मेदारी है।” यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि नागरिकों के स्वच्छ और स्वस्थ जीवन के अधिकार को भी सुनिश्चित करेगा।