काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने पहाड़ी इलाकों में सिर्फ घरों, सड़कों और पुलों को ही नहीं बहाया, बल्कि देश के महत्वपूर्ण जलविद्युत ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। धादिंग जिले के गल्छी में स्थित जेहरे पावर सबस्टेशन की तस्वीरें तबाही की भयावहता को साफ दिखाती हैं। पूरा सबस्टेशन बाढ़ के पानी और गहरे कीचड़ में डूब गया था। अब नेपाली सेना के जवान मलबे और गाद के नीचे दबे ट्रांसफॉर्मर तथा अन्य उपकरणों को बाहर निकालने में जुटे हैं।

पानी कई फीट ऊपर तक पहुंचा, सबस्टेशन हुआ जलमग्न
बाढ़ का पानी इतनी तेजी और ताकत के साथ नीचे आया कि गल्छी क्षेत्र में नदी के किनारे स्थित पावर सबस्टेशन पूरी तरह जलमग्न हो गया। स्टेशन की दीवारों पर पानी के निशान लगभग छत तक दिखाई दे रहे हैं। पावर स्टेशन में काम करने वाले इलेक्ट्रिशियन रमेश के मुताबिक, बाढ़ की सूचना मिलते ही कर्मचारी जान बचाने के लिए पहाड़ की ओर भागे। कुछ ही समय में पानी सामान्य स्तर से कई फीट ऊपर पहुंच गया और पूरा स्टेशन पानी तथा कीचड़ में डूब गया।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। ट्रांसफॉर्मर, तार और बिजली के दूसरे उपकरण नदी के किनारे मलबे के बीच बिखरे पड़े हैं। कई भारी मशीनें मोटी गाद और कीचड़ के नीचे दब गई हैं।
नेपाली सेना चला रही है मलबा हटाने का अभियान
पावर स्टेशन को दोबारा चालू करने की दिशा में सबसे बड़ी चुनौती जमीन और मशीनरी तक पहुंच बनाना है। नेपाली सेना के जवान लगातार कीचड़ और मलबा हटाकर दबे हुए ट्रांसफॉर्मर तथा उपकरणों को खोज रहे हैं। गल्छी में हुई तबाही इस बात का उदाहरण है कि बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा ढांचे को कितनी गहराई तक प्रभावित किया है। सिर्फ बिजली उत्पादन केंद्र ही नहीं, बल्कि सबस्टेशन और ट्रांसमिशन नेटवर्क भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर को अरबों का झटका
नेपाल की अर्थव्यवस्था और बिजली व्यवस्था में जलविद्युत की बड़ी भूमिका है। हालिया बाढ़ से रासुवा, नुवाकोट, धादिंग और आसपास के क्षेत्रों में कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रारंभिक आकलनों में जलविद्युत क्षेत्र को भारी आर्थिक नुकसान की बात सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार 12 जलविद्युत परियोजनाओं को हुए नुकसान का सरकारी प्रारंभिक अनुमान 80 अरब नेपाली रुपये से अधिक है।
इसमें ट्रांसमिशन और वितरण ढांचे का पूरा नुकसान अभी शामिल नहीं है। इससे पहले सामने आए प्रारंभिक आकलन में जलविद्युत, सौर ऊर्जा, सबस्टेशन और ट्रांसमिशन ढांचे को करीब 7.63 अरब नेपाली रुपये के भौतिक नुकसान का अनुमान लगाया गया था। बाद के आकलनों में नुकसान का दायरा काफी बढ़ा है।
करीब 900 कर्मचारी अब भी लापता या संपर्क से बाहर
बाढ़ की सबसे चिंताजनक तस्वीर पावर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले कर्मचारियों को लेकर है। प्रभावित इलाकों की कई जलविद्युत परियोजनाओं में सैकड़ों कर्मचारी और तकनीकी स्टाफ बाढ़ के बाद से संपर्क में नहीं हैं। कुछ कर्मचारी भूमिगत पावरहाउस और सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। इन सुरंगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है क्योंकि बाढ़ अपने साथ चट्टान, मिट्टी और भारी मलबा लेकर आई थी।
कई जगह सड़कें और पुल भी बह गए हैं, जिससे भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है। ताजा रिपोर्टों में प्रभावित परियोजनाओं से जुड़े करीब 900 से अधिक लोगों के संपर्क से बाहर होने की बात सामने आई है। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ने के साथ संख्या में बदलाव हो रहा है।
भूमिगत पावरहाउस बने उम्मीद की आखिरी जगह
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे कठिन चुनौती उन लोगों तक पहुंचने की है जो भूमिगत पावरहाउस या एक्सेस टनल में फंसे हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ भूमिगत संरचनाएं बाढ़ के सीधे प्रभाव से बची हो सकती हैं। ऐसे स्थानों में पावरहाउस का ऊपरी हिस्सा संभावित रूप से ऐसी जगह हो सकता है जहां बचे हुए कर्मचारियों को हवा और कुछ सुरक्षित जगह मिल सके।
विशेषज्ञ टीमें उपग्रह तस्वीरों, इंजीनियरिंग ड्रॉइंग और हेलीकॉप्टर से मिले दृश्य संकेतों की मदद से उन सुरंगों और भूमिगत संरचनाओं का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं, जिनके प्रवेश द्वार बाढ़ के बाद पूरी तरह गायब हो गए हैं।
बाढ़ ने बदल दिया पूरा भूगोल
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बाढ़ का असर सामान्य नदी बाढ़ से कहीं अधिक गंभीर रहा। पानी के साथ चट्टान, मिट्टी और मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि कई स्थानों की भौगोलिक संरचना ही बदल गई। जहां पहले जलविद्युत परियोजनाओं के प्रवेश द्वार और सड़कें दिखाई देती थीं, वहां अब मोटी गाद और मलबे का ढेर है। कई पुल और सड़कें बह जाने के कारण राहत एवं बचाव दलों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
बिजली उत्पादन क्षमता पर भी पड़ा असर
बाढ़ से नेपाल की बिजली व्यवस्था को दोहरा झटका लगा है। एक तरफ उत्पादन केंद्र क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रांसमिशन लाइन और सबस्टेशन भी प्रभावित हुए हैं। इसका मतलब है कि किसी परियोजना की मशीनरी ठीक होने के बाद भी बिजली को ग्रिड तक पहुंचाना अलग चुनौती हो सकती है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ ने नेपाल की लगभग 10 प्रतिशत बिजली उत्पादन क्षमता को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुनर्निर्माण केवल पहले जैसी संरचनाएं खड़ी करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि भविष्य की बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं के जोखिम को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
अब चुनौती सिर्फ पुनर्निर्माण की नहीं
नेपाल के सामने अब दो समानांतर चुनौतियां हैं—पहली, भूमिगत सुरंगों और पावरहाउस में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और दूसरी, तबाह हुए ऊर्जा ढांचे को दोबारा खड़ा करना। विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य की परियोजनाओं में शुरुआती चेतावनी प्रणाली, वैकल्पिक बिजली व्यवस्था, बेहतर जोखिम आकलन और आपदा के समय सेवाओं को जारी रखने की क्षमता पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
गल्छी का जलमग्न पावर स्टेशन इस आपदा की एक ऐसी तस्वीर बन गया है, जहां बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन उसके निशान अभी भी दीवारों पर मौजूद हैं। कीचड़ में दबे ट्रांसफॉर्मर और मुड़े हुए बिजली के तार नेपाल के सामने खड़ी उस बड़ी चुनौती की कहानी कह रहे हैं, जिसमें उसे एक साथ लोगों को बचाना, बिजली बहाल करना और भविष्य के लिए ज्यादा सुरक्षित ऊर्जा ढांचा तैयार करना है।
