नमो भारत रैपिड रेल और एलिवेटेड पुल का रूट टकराया, फरीदाबाद में बढ़ी तकनीकी चुनौती

फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। शहर में एक ही मार्ग पर दो बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के प्रस्तावित होने से प्रशासन के सामने नई इंजीनियरिंग चुनौती खड़ी हो गई है। नमो भारत रैपिड रेल और पूर्वी-पश्चिमी एलिवेटेड पुल—दोनों ही योजनाओं का रूट बाटा चौक के आसपास एक-दूसरे से टकरा रहा है, जिससे अधिकारियों को इनके समन्वय को लेकर मंथन करना पड़ रहा है।

दरअसल, दोनों परियोजनाएं शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। एक ओर रैपिड रेल परियोजना गुरुग्राम, फरीदाबाद और नोएडा को जोड़ने वाली है, वहीं एलिवेटेड पुल पूर्वी और पश्चिमी फरीदाबाद के बीच यातायात को आसान बनाएगा। ऐसे में किसी भी योजना को टालना या रूट बदलना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा।

नमो भारत रैपिड रेल के तहत प्रस्तावित कॉरिडोर गुरुग्राम से शुरू होकर फरीदाबाद के विभिन्न प्रमुख चौराहों से गुजरते हुए नोएडा के सेक्टर-142 और सूरजपुर तक जाएगा। शुरुआती योजना में जहां रूट अरावली क्षेत्र से होकर गुजरना था, वहीं संशोधित प्रस्ताव में सैनिक कॉलोनी, अनखीर चौक और बड़खल चौक को शामिल किया गया है। इस बदलाव से करीब छह किलोमीटर दूरी कम होने के साथ निर्माण कार्य को भी आसान माना जा रहा है।

इसे भूमिगत के बजाय एलिवेटेड बनाने की योजना है। इस परियोजना पर जिले में लगभग 3700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, पूर्वी-पश्चिमी कनेक्टिविटी के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड पुल सैनिक कॉलोनी से शुरू होकर प्याली-हार्डवेयर चौक होते हुए बाटा रेलवे पुल को पार कर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इस योजना की अनुमानित लागत 682.48 करोड़ रुपये है और इसकी डीपीआर पहले ही तैयार की जा चुकी है।

राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इसे जल्द शुरू करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। समस्या की जड़ यह है कि दोनों परियोजनाएं एक ही कॉरिडोर से गुजरने वाली हैं और दोनों का निर्माण सिंगल पिलर तकनीक पर प्रस्तावित है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता प्रवीण चौधरी के अनुसार, दोनों परियोजनाएं शहर के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और इन्हें समानांतर तरीके से पूरा करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

ऐसे में स्थान और संरचना के संतुलन को लेकर तकनीकी जटिलताएं सामने आ रही हैं। जल्द ही इस विषय पर उच्च स्तर की बैठक कर समाधान निकाले जाने की उम्मीद है। यदि दोनों परियोजनाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं, तो फरीदाबाद की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है, साथ ही एनसीआर के प्रमुख शहरों के बीच आवागमन भी अधिक सुगम हो जाएगा।

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Author: Prime Haryana

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