फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। ग्राम पंचायत मुजेड़ी में बिना किसी विकास कार्य के 22 करोड़ रुपये के गबन मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा जांच में ढिलाई बरतने के आरोपों के बाद, एसीबी के डीएसपी ने जांच टीम से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट के माध्यम से खुलासा हुआ है कि इस बड़े घोटाले के मुख्य सूत्रधार और तत्कालीन कार्यवाहक सरपंच बिरमपाल की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।

एसीबी का मानना है कि बिरमपाल की गिरफ्तारी इस मामले की सबसे अहम कड़ी है, क्योंकि सरकारी खाते से निकाली गई मोटी रकम को उसी ने विभिन्न साजिशकर्ताओं के बीच वितरित किया था। इस मामले में अब तक की कार्रवाई के दौरान तत्कालीन बीडीपीओ पूजा शर्मा, उनके भाई ललित मोहन, भाभी तनुजा और ठेकेदार हीरालाल सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
हालांकि, बीडीपीओ पूजा शर्मा और उनकी भाभी फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत पर हैं, लेकिन जेल में बंद ठेकेदार मनोज को अदालत से बड़ा झटका लगा है। जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार ने एसीबी की ठोस दलीलों के आधार पर मनोज की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जांच में अब तक कुल 16 आरोपियों के नाम सामने आ चुके हैं और अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे गिरफ्तारियां होंगी, इस घोटाले में संलिप्त अन्य चेहरों का भी पर्दाफाश होगा।
यह पूरा मामला एक बेहद गहरी और सुनियोजित साजिश का परिणाम बताया जा रहा है, जिसकी शुरुआत साल 2020 के आसपास हुई थी। साजिश के तहत पहले तत्कालीन महिला सरपंच रानी को एक झूठे केस में फंसाकर निलंबित कराया गया और फिर जोड़-तोड़ करके पंच बिरमपाल को कार्यवाहक सरपंच बनवाया गया। इसके बाद तत्कालीन बीडीपीओ, ग्राम सचिव और सरपंच की मिलीभगत से पंचायत के खाते में मौजूद 22 करोड़ रुपये की राशि को अलग-अलग फर्जी फर्मों और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
बीडीपीओ ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक बड़ी रकम अपने सगे भाई और भाभी की फर्म को भी भेजी थी। इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश तब हुआ जब गांव के अन्य 12 पंचों ने एकजुट होकर तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल से इसकी लिखित शिकायत की। एसीबी की जांच में सभी पंचों ने अपने बयान दर्ज कराते हुए पुष्टि की है कि रिकॉर्ड में दिखाई गई करोड़ों की अदायगी के बदले गांव में धरातल पर कोई भी विकास कार्य नहीं किया गया। मुख्यमंत्री के आदेश पर साल 2022 में दर्ज हुई इस एफआईआर के बाद अब जांच टीम का पूरा ध्यान फरार आरोपियों को दबोचने पर है।
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