फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। बल्लभगढ़ क्षेत्र के गांवों में लाल डोरा आबादी के भीतर संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवादों के समाधान की जिम्मेदारी अब पंचायत विभाग से हटाकर राजस्व विभाग को सौंप दी गई है। पंचायत विभाग के निदेशक ने इस संबंध में अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।

लाल डोरा उस आबादी को कहा जाता है जो गांव के निर्धारित नंबर के अंदर आती है। पहले इन क्षेत्रों में संपत्तियों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता था, और न ही रजिस्ट्री की व्यवस्था थी। ऐसे में संपत्ति खरीद-बिक्री केवल इकरारनामे के आधार पर होती थी।
सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत इन मकानों और प्लॉट्स का मालिकाना हक वहां रहने वाले लोगों को दे दिया। कई मामलों में एक ही मकान में रहने वाले भाइयों को संयुक्त रूप से मालिक बनाया गया। पंचायत विभाग ने करीब 170 रुपये शुल्क लेकर इन संपत्तियों की रजिस्ट्री तहसीलदार के माध्यम से कराई।
हालांकि, अब रजिस्ट्री से जुड़े कई विवाद सामने आ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, कई मामलों में बड़े भाई ने अपने नाम से रजिस्ट्री करा ली, जबकि अन्य भाइयों के नाम शामिल नहीं किए गए। ऐसे मामलों में पहले लोग पंचायत अधिकारियों—डीडीपीओ और बीडीपीओ—के पास शिकायत करते थे, जहां सुनवाई होती थी।
अब पंचायत विभाग ने इन मामलों में हस्तक्षेप से पीछे हटते हुए स्पष्ट किया है कि आगे से ऐसे सभी विवादों की सुनवाई राजस्व विभाग के अधिकारी करेंगे। तहसीलदार बल्लभगढ़ भूमिका लांबा के अनुसार, इस संबंध में पत्र प्राप्त हो चुका है, लेकिन सरकार की ओर से विस्तृत एसओपी आने के बाद ही प्रक्रिया पूरी तरह लागू होगी। वहीं, बीडीपीओ बल्लभगढ़ अंशु डागर ने बताया कि जनवरी 2025 में जारी अधिसूचना के बाद अब नए निर्देशों के तहत राजस्व विभाग ही इन मामलों को देखेगा।