फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब मेडिकल टूरिज्म पर भी साफ दिखाई देने लगा है। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के निजी अस्पतालों में विदेश से आने वाले मरीजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। खासतौर पर खाड़ी देशों से आने वाले मरीजों ने अपनी यात्राएं टाल दी हैं, जिसके चलते अस्पतालों के इंटरनेशनल लाउंज खाली पड़े हैं।

पहले जहां हर महीने बड़ी संख्या में विदेशी मरीज यहां इलाज के लिए आते थे, वहीं अब यह संख्या लगभग शून्य के बराबर हो गई है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़े प्रभाव और सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंताओं के कारण मरीज और उनके परिजन यात्रा करने से बच रहे हैं, जिसका सीधा असर अस्पतालों के साथ-साथ होटल, कैब सर्विस और स्थानीय टूरिज्म पर भी पड़ रहा है।
फरीदाबाद के अस्पताल अपनी आधुनिक सुविधाओं और अपेक्षाकृत कम खर्च में बेहतर इलाज के लिए पहले से ही विदेशी मरीजों के बीच लोकप्रिय रहे हैं, जहां इलाज का खर्च अन्य देशों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत तक कम आता है, लेकिन मौजूदा हालात ने इस क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो मेडिकल टूरिज्म को और अधिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
पहले हर महीने करीब 50 विदेशी मरीज, खासकर खाड़ी देशों से, इलाज के लिए आते थे, लेकिन अब उन्होंने अपनी यात्रा टाल दी है। यहां तक कि गंभीर मरीज भी अब नहीं आ रहे हैं, जिसका असर अस्पताल के साथ-साथ होटल और कैब सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है।
संदीप कुमार (मार्केटिंग डायरेक्टर, एकॉर्ड अस्पताल)
पहले सऊदी अरब, इराक, ओमान, उज़्बेकिस्तान और कुवैत जैसे देशों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते थे, जिनमें हृदय, किडनी, हड्डी और कैंसर के मरीज अधिक होते थे। अब विदेशी मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है और यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो मेडिकल टूरिज्म को और अधिक नुकसान हो सकता है।
डॉ. सुमंत गुप्ता (कैंसर विभाग प्रमुख, मेट्रो अस्पताल)