फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। आमतौर पर मक्के के छिलकों और डंठल को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, लेकिन सही हुनर और रचनात्मक सोच से इन्हीं चीजों को कमाई का जरिया बनाया जा सकता है। दादी फूलमती की सीख से प्रेरित परिधि नरवर ने इसी सोच को कारोबार का रूप दिया। उनकी इस पहल से आज उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की 100 से अधिक ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं और हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं।

परिधि नरवर बचपन से ही अपनी दादी को बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं से उपयोगी चीजें बनाते देखती थीं। स्कूल से लौटने के बाद वह भी उनके साथ कुछ नया बनाने का प्रयास करती थीं। दादी की सीख थी कि प्रकृति की कोई भी वस्तु व्यर्थ नहीं होती, जरूरत केवल उसे सही नजरिए और हुनर के साथ इस्तेमाल करने की है। इसी विचार ने आगे चलकर एक अनूठे उद्यम की नींव रखी।
मक्के के छिलकों से तैयार हो रहे आकर्षक उत्पाद
वर्ष 2024 में शुरू हुई इस पहल के तहत मक्के के छिलकों और डंठल से चटाइयां, पर्स, फूल, ट्रे और कई तरह की सजावटी वस्तुएं बनाई जा रही हैं। इन उत्पादों में ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, पारंपरिक कारीगरी और रचनात्मकता साफ दिखाई देती है। इस पहल से न केवल कृषि अपशिष्ट का बेहतर इस्तेमाल हो रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। गांव के पुरुषों को भी इस काम से जोड़ा गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन विकसित हो रहे हैं।
सूरजकुंड दिवाली मेले में आकर्षण बने हस्तनिर्मित उत्पाद
फरीदाबाद में आयोजित सूरजकुंड दिवाली मेले में फूलजा फाउंडेशन की ओर से इन उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई है। फाउंडेशन के प्रोग्राम ऑफिसर प्रदीप चंद्र के अनुसार, स्टॉल पर रखी वस्तुओं को देखने के लिए लोग उत्सुकता दिखा रहे हैं। आमतौर पर बेकार समझे जाने वाले मक्के के छिलकों से इतनी सुंदर और उपयोगी चीजें तैयार होना लोगों के लिए आकर्षण का विषय बना हुआ है।
प्राकृतिक सामग्री से बने इन उत्पादों की खासियत इनका अनूठा डिजाइन और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण प्रक्रिया है। इनके माध्यम से यह संदेश भी दिया जा रहा है कि खेती से निकलने वाले अवशेषों का इस्तेमाल केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे नए उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है।
यूट्यूब और एआई से सीखी नई तकनीकें
प्रदीप चंद्र ने बताया कि उत्पादों के नए डिजाइन, निर्माण की तकनीकों और बाजार में उनकी संभावनाओं को समझने के लिए यूट्यूब और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली जाती है। इन माध्यमों से नई जानकारियां हासिल कर उन्हें उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाता है। इन हस्तनिर्मित वस्तुओं को ऑनलाइन वेबसाइट के माध्यम से भी ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।
इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
कृषि अपशिष्ट से कमाई और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
खेती के दौरान निकलने वाले अवशेषों का कई बार उचित इस्तेमाल नहीं हो पाता। कुछ किसान इन्हें जला देते हैं, जबकि कुछ पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में मक्के के छिलकों और डंठल को उपयोगी वस्तुओं में बदलना अपशिष्ट प्रबंधन का एक रचनात्मक विकल्प बनकर सामने आया है। इस पहल का उद्देश्य केवल कारोबार बढ़ाना नहीं, बल्कि ग्रामीण संसाधनों का बेहतर उपयोग करके स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराना भी है।
दादी की एक छोटी-सी सीख से शुरू हुआ यह सफर आज पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण का उदाहरण बन रहा है। यह पहल बताती है कि जिसे दुनिया बेकार समझती है, सही सोच और मेहनत से वही किसी के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार बन सकता है।
