फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। नगर निगम में विकास कार्यों की रफ्तार एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बड़खल जोन में करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट शुरू न होने पर मेयर प्रवीण बतरा जोशी ने एक कार्यकारी अभियंता के खिलाफ सरकार को शिकायत भेजते हुए कार्रवाई की मांग की है। मेयर के अनुसार, बड़खल जोन में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से 34 से अधिक विकास कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं।

लेकिन तय समय सीमा बीतने के बावजूद एक भी कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका। इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में नगर निगम प्रशासन ने संबंधित कार्यकारी अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मेयर ने मामले को गंभीर मानते हुए सरकार को पत्र लिखकर कार्रवाई की सिफारिश की है।
साथ ही निगम की ओर से पूरे प्रकरण की जांच चीफ इंजीनियर विवेक गिल को सौंपी गई है। जांच में लापरवाही सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि जिन कार्यों में देरी हुई है, उनमें बड़खल विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न वार्डों के विकास कार्य शामिल हैं। इनमें वार्ड-15 में विहार पार्क का नवीनीकरण, वार्ड-16 में इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने और नालियों के निर्माण जैसे कार्य प्रमुख हैं।
इन सभी कार्यों के लिए वर्क ऑर्डर जारी होने के बावजूद काम शुरू नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों की मानें तो नगर निगम और राजनीतिक स्तर पर चल रही आपसी खींचतान भी विकास कार्यों में देरी का एक कारण मानी जा रही है। बड़खल क्षेत्र के अलग-अलग जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी का असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। बड़खल विधायक किशनपाल गुज्जर का समर्थक है।
वार्ड-16 के पार्षद मनोज नासवा ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्य लंबित हैं, जिससे जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मेयर प्रवीण बतरा जोशी का कहना है कि वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद भी कार्य शुरू न होना गंभीर लापरवाही है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगर निगम में पहले भी आपसी मतभेदों के चलते कई अहम फैसले लंबित रहे हैं।
इसमें पार्षदों के दो गुट बने हुए है एक गुट किशनपाल गुज्जर का और दूसरा राजेश नागर और विपुल गोयल कसमर्थक गुट है। इस कारण सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव अब तक नहीं हो पाया है, वहीं फाइनेंस कमेटी का गठन भी अटका हुआ है। ऐसे में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार शहर की व्यवस्था पर असर डाल रही है।